नियमानुसार, पीएम आवास निर्माण का ठेका नहीं दिया जा सकता। यह आवास हितग्राही को खुद ही बनाने होते हैं, लेकिन श्योपुर, कराहल व विजयपुर में 35 से ज्यादा ग्राम पंचायतों ने पीएम आवासों का ठेका दे दिया। गड़बड़ी यह हो गई कि 220 आवासों की दो-दो किश्त का (80-80 हजार) रुपया लेकर ठेकेदार गायब हो चुके हैं। अब इन ठेकेदारों पर एफआईआर की तैयारी हो रही है।

आवास का काम जल्दी करने के लिए अफसरों का दबाव ग्राम पंचायतों पर है। इसी दबाव में आकर पंचायतों ने अपने स्तर पर ही पीएम आवासों का ठेका दे दिया। अब हालात यह हैं कि विजयपुर, कराहल व श्योपुर जनपद में 220 से ज्यादा आवासों के 01 करोड़ 75 लाख रुपए लेकर ठेकेदार चंपत हो गए हैं।

दूसरी तरफ 75 आवास ऐसे हैं जिनके लगभग 60 लाख रुपयों को हितग्राही ने ही दूसरे कामों में खर्च कर दिया है। आवास बनाने की बजाय किसी ने पुराना कर्जा चुका दिया, किसी ने दुकान खोल ली, किसी ने बाइक खरीद ली है। अब इन ठेकेदार व हितग्राहियों पर प्रशासन सख्ती बरतने का मूड बना चुका है। ठेकेदारों पर एफआईआर होना तय हो है और हितग्राहियों से राशि की वसूली होगी।

कहीं ठेकेदार तो कहीं हितग्राही लगा रहे सेंध

-बड़ौदा के रहने वाले गिर्राज जाटव ने आवदा गांव में 10 हितग्राहियों के आवास बनाने के लिए 80-80 हजार रुपए ले लिए, लेकिन हितग्राहियों के पीएम आवास का निर्माण नहीं करवाया। अफसरों के अनुसार अब ठेकेदार लापता है इसलिए गिर्राज जाटव पर एफआईआर होनी है।

-गिर्राज बैरवा नाम के ठेकेदार ने कराहल ब्लॉक के बुखारी गांव में 12 आदिवासी परिवारों के पीएम आवास बनाने का ठेका लिया। ठेकेदार ने 12 आवासों की दो-दो किश्तों का पैसा हितग्राहियों से ले लिया, लेकिन उनके आशियाने नहीं बनाए। ग्रामीणों का कहना है कि, अब ठेकेदार नहीं मिल रहा।

-भीमलत गांव के कैलाश पुत्र अर्जुन आदिवासी को पीएम आवास की दो किश्तों का पैसा मिल चुका है, लेकिन उसने घर बनाया नहीं। बताया गया है कि कैलाश ने राशि पुराने कर्ज व शराब की आदत में फूंक दी।

-आवदा गांव के चतुरू पुत्र डोलिया आदिवासी को दो किश्तों का पैसा लेकर जयपुर चला गया और वहीं काम करने लगा है। इसी तरह भेला-भीमलत गांव का हितग्राही कैलाश पुत्र अर्जुन आदिवासी पीएम आवास की किश्त को दूसरे कामों में खर्च दिया है।

राजस्थान तक का ठेकेदार ले गया गरीबों के पैसे

गरीब हितग्राहियों के आवास का पैसा डकारने के लिए ऐसे-ऐसे ठेकेदार बन गए जिन्होंने जीवन में कोई सरकारी काम नहीं लिया। हद इस दर्जे की हुई है कि, पड़ोसी राज्य राजस्थान के भी छोटे-मोटे ठेकेदारों को ग्राम पंचायतों ने पीएम आवास का ठेका दे दिया और अब यह ठेकेदार ढूंढे नहीं मिल रहे। बुखारी ग्राम पंचायत ने राजस्थान के खातौली क्षेत्र के दीपक कुमार नाम के ठेकेदार को 4 शौचालय बनाने का काम दिया। चारों शौचालय की दो-दो किश्त का पैसा लेने के बाद राजस्थान का ठेकेदार गायब हो चुका है।

अवैध ठेकों की एफआईआर कैसे कराएगा प्रशासन?

जिन-जिन गांवों में आवास निर्माण का ठेका दिया गया है वह पूरी तरह अवैध है। चौंकाने वाली बात यह है कि, यह गलत काम पूरे प्रशासन के सामने हुआ है। अफसरों के दबाव में गांव के सचिव व रोजगार सहायक ने ठेकेदार तलाशे और हितग्राहियों का पैसा ठेकेदारों को देकर काम का जिम्मा सौंप दिया। यह ठेका किसी भी सरकारी रिकार्ड में नहीं। अब कई ठेकेदार गायब हो गए तो पंचायत से लेकर जनपद तक के अधिकारी इसके लिए हितग्राही को जिम्मेदार बता रहे हैं और कह रहे हैं कि, हितग्राही ने खुद ठेका दिया है। जबकि, सच यह है कि, इन ठेकेदारों को पंचायतें ढूंढकर लाईं। सवाल यह है कि यह ठेके सरकारी हिसाब-किताब में नहीं और ठेकेदारों को पैसा दिए जाने का भी कोई रिकार्ड नहीं ऐसे में प्रशासन इन ठेकेदारों पर एफआईआर किस तरह कराएगा?

इनका कहना है

-यह सही है कि कई हितग्राहियों ने किश्त मिलने के बाद भी आवास नहीं बनाए। इनसे कलेक्टर कोर्ट के माध्यम से राशि की वसूली होगी। कई गांवों में ठेकेदारों ने आवास का काम ले लिया और दो-दो किश्त का पैसा लेकर गायब हो गए। ऐसे ठेकेदार हमने चिन्हित कर लिए हैं इन पर एफआईआर करवाई जाएगी।

ऋषि गर्ग सीईओ, जिला पंचायत श्योपुर

-सचिव व रोजगार सहायक ही ठेकेदार ढूंढकर लाए हैं। हमसे कहा कि खाते में आए पैसे ठेकेदार को दे दो तुम्हारा घर जल्दी बन जाएगा। हमने दोनों किश्त के पैसे दे दिए। अब ठेकेदार भाग गया। हमें कुछ नहीं पता पंचायत अब हमारा आवास बनाकर दे।