Mother’s Day: मदर्स डे पर बच्चों की भावनाएं चरम पर होती है। कोई मां के साथ अपने रिश्ते को खूबसूरत कविता के रूप में बयान करता है तो किसी के लिए मां के प्रति प्यार के इजहार के लिए शब्दों की सीमा नाकाफी होती है।
सर्च इंजन गूगल के लिए कई देशों में इस डूडल दिखाई दे रहा है मातृ दिवस 2018 का उत्सव मना कर मात्रत्व को सर्मपित किया है ।
रिश्ते तो बहुत हैं, मां सिर्फ एक है, मेरी मां
अपनी मां के परिश्रम और लगन की गाथा बताते हुए नीतू अग्रवालभावुक हो उठी। उनके शब्द थे ‘बागों में फूल बहुत हैं लेकिन गुलाब एक है, रिश्ते बहुत हैं लेकिन मां सिर्फ एक है।’
प्रेमलता सरीन (योग प्रशिक्षिका) के अनुसार ‘धरती की तरह मां भी अपने जीवन में बच्चों का सुरक्षा कवच बनती है। मां की ममता को किसी परिभाषा में बांधना मुश्किल है।’
श्रीमती विमलेश श्रीवास्तव कहती है-‘दुनिया में आने के बाद बच्चा सबसे पहले मां को ही पहचानता है और उसके मुंह से निकलने वाला पहला शब्द मां ही होता है।
कमलेश बेरी अपनी अनुभूति कविताओं में व्यक्त करते हैं-‘मां है प्रीत, मां है मीत, नेह का सागर मां ही है, मां है प्रकाश, मां है आकाश, जीवन की भोर मां ही है…।’
कार्मल कान्वेंट स्कूल की नन्ही छात्रा प्रज्ञा मालवीय ने कहा,’भगवान हर जगह हमारे साथ नहीं रह सकते इसलिए उन्होंने मांह के रूप में अपनी सबसे प्यारी छवि को हमारे पास भेजा है।
ज्योति जोशी भावुक शब्दों में कहती है, ‘मुझे अपनी मां का साथ जिंदगी की कड़ी धूप में शीतल छाया की तरह लगता है। मेरी हर समस्या का इलाज मेरी मां के पास है चाहे अचार डालना हो या कोई पकवान बनाना हो या फिर कोई भी व्यक्तिगत उलझन,मेरी हर परेशानी मां के पास जाकर खत्म हो जाती है। मेरी मां कहती है कि जो भी स्थिति आए रोने या कमजोर होने के बजाए उसका सामना दृढ़ता के साथ करो।’
आशा साहू बताती है,’ मैंने असमय मौत का शिकार हुई अपनी जेठानी के बच्चों की मां बनकर सर्वप्रथम मातृत्व को महसूस किया और फिर अपने बच्चों के साथ ही जेठानी के बच्चों को भी मां की कमी महसूस नहीं होने दी। आज मुझे बच्चों व नाती-पोतों के भरे-पूरे परिवार की सदस्य के रूप में गर्व का अहसास होता है।
संध्या रामकृष्ण बायवार के शब्द कविता में कुछ यूं ढले- ‘मां की महिमा क्या गाऊं, मां की कहानी क्या सुनाऊं, हे मां तू है महान, तूने हमको जन्म दिया, मिले हर जन्म में तेरी को,मां तुझे सलाम’।
