Moong: सियाराम वेयरहाउस की मूंग का होगा वेरीफिकेशन, भोपाल से आएगी विशेष जांच टीम । सिहोरा के पास स्थित सियाराम वेयर हाउस में पाई गई खामी की गहन पड़ताल जारी है। पोर्टल पर दर्ज आकड़े के मुकाबले कम मात्रा मेंं मूंग पाए जाने का खुलासा तो पहले ही हो चुका था। अब प्रशासन की ओर से यह पता लगाने की काेशिश की जा रही है वहां जो मूंग उपलब्ध है- उसकी गुणवता कैसी है? वह इसी सीजन की खरीदी हुई मूंग है या फिर उसे कहीं और से लाकर यहां रखवाया गया है। इसे लेकर सवाल छापामारी के बाद से ही उठ रहे हैं।
कराया जाएगा मूंग का सत्यापन
वेयर हाउसिंग एंड लाजिस्टिक्स कार्पोरेशन के जिला प्रबंधक सखाराम निमोदा ने बताया कि सियाराम वेयर हाउस में इस वक्त रखी मूंग की भी जांच कराई जाएगी। इस जांच में देखा जाएगा कि मूंग इसी सीजन की है या फिर पुरानी। प्रथमदृष्टि में मूंग के अमानक होने के संकेत मिल रहे हैं। इसे ही आधार बनाकर मूंग का भौतिक सत्यापन कराया जाएगा। वेयर हाउसिंग एंड लाजिस्टिक्स कार्पोरेशन के भोपाल कार्यालय से एक टीम जबलपुर आ रही है, जो मूंग की गुणवत्ता को जांचेगी और पूरे मामले की जांच करेगी। समझा जाता है कि इस जांच से कुछ ऐसे नए तथ्य सामने आ सकते हैं जो नए राज खोल सकते हैं। इधर सूत्रों का कहना है कि मूंग में बड़े पैमाने पर घुन लगी हुई है, जो इस सीजन की नहीं महसूस हो रही। इस मूंग को कथित तौर पर खरीदी समाप्त होने के बाद गोदाम में रखवाया गया है।
यह रहा मामला
कलेक्टर के निर्देश पर एक जांच दल ने सियसराम वेयर हाउस का निरीक्षण किया था। वहां 40 हजार क्विंटल मूंग की खरीदी पोर्टल पर शो हो रही थी। लेकिन वास्तव में वहां 32 हजार क्विंटल मूंग ही ही मिली थी। 80 क्विंटल कहां गई, इस बारे में वेयर हाउस संचालक के पास कोई जवाब नहीं रहा। जिस पर पुलिस में एफआइआर भी दर्ज की गई।
एक बड़ा सवाल यह भी
इस मामले में सिहोरा की वेयरहाउसिंग एंड लाजिस्टिक्स मैनेजर लक्ष्मी ठाकुर को भोपाल स्थानांतरित कर दिया गया। उनका नाम एफआइआर में नहीं दर्ज कराया जाना संदेह को जन्म दे रहा है। सूत्रों से जानकारी मिल रही है कि वेयरहाउस में उपार्जन का काम देख रहे एफपीओ की मुखिया परोक्ष रूप से लक्ष्मी ठाकुर ही रही। इसी तरह का एक मामला करीब डेढ़ महीने पहले चरगवां में भी देखने में आया था। वहां मयंक वेयर हाउस में गड़बड़ी के बाद एफआइआर तो कराई गई थी, लेकिन एफपीओ में जिन प्रभावशाली लोगों का दखल रहा, उनका नाम कहीं नहीं आया था। वहां के एफपीओ में एक सेवानिवृत्त खाद्य अधिकारी की पत्नी डायरेक्टर मंडल की सदस्य रही।
नाफेड ने भी उठाए थे सवाल
नाफेड ने भी खरीदी के दौरान ही जिले के विभिन्न खरीदी केंद्रों की जांच कराई थी, उस दौरान 14 केन्द्र ऐसे मिले थे, जहां की मूंग गुणवत्ताविहीन रही। लेकिन बाद इन केन्द्राें की सूची को ही दबा दिया गया था। इधर भुगतान की प्रक्रिया चलती रही। नाफेड की टीम ने जिन वेयर हाउसों में निम्न गुणवत्ता की मूंग बताई थी उनमें श्रीराज वेयर हाउस बेगमगंज, हिमांशु वेयर हाउस बघेली, मां रेवा वेयर हाउस शेरपुर, अनुश्री वेयर हाउस क्षिप्रा फर्मस कम्पनी, ठाकुर वेयर हाउस मुर्रई, मधुर शिवम वेयर हाउस, उत्तम ज्योति वेयर हाउस तेवर, भाग्यवती वेयर हाउस तेवर, दद्दा वेयर हाउस मझौली, मैना वेयर हाउस बरखेड़ा, एमपीडब्ल्यूएलसी-02 बुढ़ागर, आदि एवं बालाजी वेयर हाउस वृहताकार सहकारी समिति शामिल हैं।
