घर में घुसकर आदिवासी परिवार के साथ बर्बतापूर्वक मारपीट का आरोपी खनन माफिया दीपक सिंह परिहार व उसके साथी पुलिस की पहुंच पकड़ से कोसो दूर, फरारी में मामला वापस लेने दी जा रही जान से मारने की धमक
कटनी। जिले के कुठला थाना अंतर्गत ग्राम कंहवारा में अवैध उत्खनन का विरोध करने पर घर में घुसकर आदिवासी परिवार के साथ बर्बता पूर्वक मारपीट करने वाले खनन माफिया दीपक सिंह परिहार व उसके साथियों पर प्रभावी कार्रवाई की हिम्मत अब तक नहीं जूटा पाई है। पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा तक मामले की शिकायत करने के बाद कुठला पुलिस ने खनन माफिया दीपक सिंह परिहार व उसके साथियों के विरूद्ध एससी/एसटी एक्ट सहित अन्य धाराओं के तहत मामला तो दर्ज कर लिया है लेकिन आरोपियों की गिरफ्तारी अब तक नहीं हो पाई है। जिसके कारण खुलेआम घूम रहा खनन माफिया दीपक सिंह परिहार व उसके साथी अब आदिवासी परिवार को धमकाते हुए मामला वापस के लिए धमका रहे हैं। पीडि़त आदिवासी परिवार ने पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संतोष डेहरिया व नगर पुलिस अधीक्षक नेहा पच्चीसिया सहित कुठला थाना प्रभारी राजेन्द्र प्रसाद मिश्रा का ध्यान इस ओर आकर्षित कराते हुए खनन माफिया दीपक सिंह परिहार व मामले में दूसरे आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की है। पीडि़त आदिवासी परिवार का यह भी आरोप है कि खनन माफिया की पुलिस से अच्छी सांठगांठ है तथा वो इसके पूर्व झूठी शिकवा शिकायत करके कुठला के एक थाना प्रभारी को भी हटवा चुका है। इसलिए उस पर पुलिस की खाकी का एक भी खौफ नहीं है तथा वो खुलेआम घूमते हुए उनका धमका रहा है। गौरतलब है कि कुठला थाना अंतर्गत ग्राम कन्हवारा में बीते दिनों अवैध उत्खनन का विरोध करना आदिवासी परिवारों को भारी पड़ गया था। खनन से जुड़े खनन माफिया दीपक सिंह परिहार सहित उसके साथियों ने आधी रात गांव पहुंचकर तीन परिवारों के घरों में घुसकर महिलाओं और पुरुषों के साथ बेरहमी से मारपीट की थी। इस हमले में कई लोग घायल हो गए थे, जिनमें एक गर्भवती महिला भी शामिल थी। घटना के बाद पुलिस ने पीडि़त की शिकायत पर खनन माफिया दीपक सिंह परिहार सहित तीन नामजद आरोपियों सहित अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं और एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था। इसके बाद पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी लेकिन आरोपी क्षेत्र की जनता को घूमते फिरते मिल रहे हैं परंतु पुलिस को अब तक आरोपी नहीं मिल पाए हैं। जिससे यह मामला पुलिस की साख को भी बट्टा लगा रहा है। उल्लेखनीय है कि ग्राम कन्हवारा क्षेत्र के जंगलों में लंबे समय से मुरूम, बॉक्साइट और आयरन ओर का अवैध उत्खनन किया जा रहा है। आदिवासी परिवारों ने इसकी शिकायत वन विभाग और संबंधित अधिकारियों से की थी। आरोप है कि कार्रवाई के बजाय शिकायत की जानकारी ही खनन से जुड़े लोगों तक पहुंचा दी गई। जिसके बाद बीती 14 और 15 मार्च की दरमियानी रात करीब 2 बजे खनन माफिया दीपक सिंह परिहार के साथ आधा दर्जन से अधिक लोग वाहनों से गांव पहुंचे और तीन आदिवासी परिवारों के घरों में घुसकर बर्बता पूर्वक मारपीट की थी। आरोपियों ने सुखदेव प्रसाद उर्फ भूरा कोल सहित घर में मौजूद महिलाओं और पुरुषों को लात-घूंसों और डंडों से पीटा था। इस दौरान घर में मौजूद एक गर्भवती महिला के साथ भी धक्का-मुक्की की गई थी। यहां तक कि पीडि़त गोरेलाल कोल ने आरोप लगाया था कि हमलावर उसे जबरन वाहन में बैठाकर उत्खनन स्थल तक ले गए और वहां भी मारपीट की थी। बहरहाल कुठला पुलिस ने पीडि़त भूरा उर्फ सुखदेव प्रसाद कोल की रिपोर्ट पर दीपक सिंह परिहार, अभिषेक पटेल सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 296, 115;2द्धए 191(2), 190, 331(6), 351(3) तथा एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(द), 3(1)(ध), 3(2)(क), 3(2)(5) के तहत प्रकरण दर्ज किया और आरोपियों की तलाशस में जुट गई लेकिन खनन माफिया दीपक सिंह परिहार से पुलिस की जुगलबंदी कुछ इस तरह से है कि अब तक न तो वो पुलिस को मिल रहा है और न उसके साथी पुलिस की गिरफ्त में आ रहे हैें लेकिन आम जनता को घूमते फिरते मिल रहे हैं और पीडि़त आदिवासी परिवार को धमका रहे हैं।
ग्रामीणों ने बताई दीपक की गुंडई
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र के जंगलों में लंबे समय से अवैध खनन का कारोबार चल रहा है। शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से खनन में लगे लोगों के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अवैध उत्खनन के खिलाफ आवाज उठाने वालों को धमकाया जाता है और विरोध करने पर ऐसे हमले किए जाते हैं। कन्हवारा की यह घटना केवल मारपीट का मामला नहीं बल्कि कानून व्यवस्था और प्राकृतिक संसाधनों की लूट से जुड़ा गंभीर सवाल भी है। यदि अवैध उत्खनन करने वालों के हौसले इतने बुलंद हो जाएं कि वे आधी रात ग्रामीणों के घरों में घुसकर महिलाओं तक से मारपीट करें तो यह प्रशासनिक व्यवस्था के लिए भी चुनौती है। खनिज संपदा का अवैध दोहन और उसके खिलाफ आवाज उठाने वालों को डराने की कोशिश यह बताती है कि कुछ लोग खुद को कानून से ऊपर समझने लगे हैं। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में यह साफ संदेश जाना जरूरी है कि नियमों को ताक पर रखकर प्राकृतिक संपदा की लूट और निर्दोष लोगों पर हमला करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस आरोपियों को कितनी जल्द गिरफ्तार कर कानून के दायरे में लाती है और संबंधित विभाग अवैध उत्खनन के पूरे नेटवर्क पर कितनी सख्त कार्रवाई करता है।
