तिलक स्नातकोत्तर महाविद्यालय में उमंग कार्यक्रम के अंतर्गत मानसिक स्वास्थ्य एवं शैक्षणिक संस्थानों में आत्महत्या की रोकथाम विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

तिलक स्नातकोत्तर महाविद्यालय में
उमंग कार्यक्रम के अंतर्गत मानसिक स्वास्थ्य एवं शैक्षणिक संस्थानों में आत्महत्या की रोकथाम विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोज

कटनी- शासकीय तिलक स्नातकोत्तर महाविद्यालय,में 15 जनवरी 2026 को उमंग कार्यक्रम के अंतर्गत मानसिक स्वास्थ्य एवं शैक्षणिक संस्थानों में आत्महत्या की रोकथाम विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सुनील कुमार वाजपेई की अनुशंसा पर आयोजित की गई।

कार्यक्रम की शुरुआत महाविद्यालय की प्रशासनिक अधिकारी डॉ. माधुरी गर्ग के उद्बोधन से हुई। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि
आज के प्रतिस्पर्धात्मक और तनावपूर्ण शैक्षणिक वातावरण में विद्यार्थियों का मानसिक रूप से स्वस्थ रहना अत्यंत आवश्यक है। शैक्षणिक संस्थानों की यह जिम्मेदारी है कि वे विद्यार्थियों को केवल अकादमिक रूप से ही नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से भी सशक्त बनाएं। ऐसी कार्यशालाएं छात्रों में सकारात्मक सोच विकसित करने और जीवन के प्रति आशावादी दृष्टिकोण पैदा करने में सहायक होती हैं।”

 

कार्यक्रम की अगली कड़ी में जिला अस्पताल से आईं माधुरी शिवहरे ने मानसिक स्वास्थ्य की आवश्यकता और इसके प्रति जागरूकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी के कारण समाज में आत्महत्या जैसी घटनाएं विकराल रूप ले रही हैं। इसे रोकने के लिए विशेष रूप से विद्यार्थी समूह को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाना अनिवार्य है।

इसके पश्चात सविता शिवहरे ने परिवार नियोजन की सामाजिक आवश्यकता, गर्भावस्था के दौरान आने वाली समस्याओं तथा उनसे संबंधित आवश्यक सावधानियों पर प्रकाश डाला और विद्यार्थियों से इस विषय पर संवाद किया।

जिला अस्पताल से आए हेमंत श्रीवास्तव ने रक्तदान की महत्ता पर अपने विचार रखते हुए कहा कि वर्तमान समय में रक्त की आवश्यकता निरंतर बढ़ रही है। उन्होंने युवाओं से आगे आकर रक्तदान करने की अपील की और रक्तदान को महादान बताते हुए इसे जीवन बचाने वाला दान कहा।

कार्यक्रम में हिंदी विभाग से डॉ. विजय कुमार ने मानसिक स्वास्थ्य की व्यावहारिकता पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य की कमी से समाज पर दूरगामी प्रभाव पड़ते हैं। शारीरिक अभ्यास के साथ-साथ मानसिक अभ्यास भी आवश्यक है, ताकि मस्तिष्क स्वस्थ और सक्रिय बना रहे। उन्होंने भारतीय दर्शन का उल्लेख करते हुए कहा—मन के हारे हार है और मन के जीते जीत”, और आध्यात्मिक चिंतन को मानसिक संतुलन का प्रभावी माध्यम बताया। कार्यक्रम का संचालन महाविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के प्रभारी श्री राजेंद्र वर्मा ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन डॉ. सुचि सिंह द्वारा किया गया। इस अवसर पर वनस्पति विभाग से ज्योत्सना आठ्या, अंग्रेजी विभाग से जी. एम. मुस्तफा, डॉ. रुक्मणि प्रताप सिंह, डॉ. सुचि सिंह, डॉ. अंकिता खंडेलवाल, डॉ. शैलजा बरसैंया, डॉ. ज्योत्सना पाठक, अमित कुमार चौधरी, घनश्याम गेडाम, नरेश कुलस्ते, शुभेंदु मिश्रा, डॉ. सुशील मिश्रा सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यशाला में सहभागियों ने विषय को अत्यंत उपयोगी एवं समयानुकूल बताते हुए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

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