TET अनिवार्यता के विरोध में राज्य कर्मचारी संघ का ज्ञापन, सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर करने की मां
कटनी।। मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ जिला कटनी द्वारा शिक्षक पात्रता परीक्षा TET को अनिवार्य किए जाने के मुद्दे पर प्रदेश सरकार से हस्तक्षेप की मांग करते हुए माननीय मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपा गया। संघ ने लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी पत्र पर रोक लगाने और Supreme Court of India में रिव्यू पिटीशन दायर करने की मांग की है।
संघ ने अपने ज्ञापन में कहा कि शिक्षक पात्रता परीक्षा को शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 23(1) के तहत अनिवार्य किया गया है, जिसका उद्देश्य कक्षा 1 से 8 तक के शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता निर्धारित करना है। यह प्रावधान भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21‑A के अंतर्गत 6 से 14 वर्ष के बच्चों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा के अधिकार को लागू करने से जुड़ा है। संघ का कहना है कि यह नियम 2009 के बाद नियुक्त शिक्षकों पर लागू होता है, जबकि इससे पहले नियुक्त शिक्षकों पर इसे लागू करना उचित नहीं है।
ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल द्वारा 3 मार्च 2026 को जारी पत्र शासन स्तर, मंत्रिमंडल या स्कूल शिक्षा विभाग के सचिवालय से आवश्यक अनुमोदन लिए बिना जारी किया गया प्रतीत होता है। संघ ने यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE) द्वारा इस संबंध में राज्यों को क्या निर्देश दिए गए हैं।
संघ के अनुसार प्रदेश में वर्तमान शिक्षक संवर्ग—जिसमें शिक्षक, अध्यापक, माध्यमिक शिक्षक और प्राथमिक शिक्षक शामिल हैं—की प्रारंभिक नियुक्ति शिक्षाकर्मी और संविदा शिक्षक के रूप में हुई थी। ये नियुक्तियां मध्यप्रदेश शासन द्वारा जारी विभिन्न भर्ती अधिनियमों और सेवा नियमों के तहत की गई थीं, जिनमें TET परीक्षा उत्तीर्ण करना सेवा-शर्त के रूप में कहीं उल्लेखित नहीं था।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि Supreme Court of India के एक निर्णय में यह स्पष्ट किया गया है कि किसी भी कर्मचारी की सेवा शर्तों को नियुक्ति के बाद बदला नहीं जा सकता। ऐसे में संचालनालय का पत्र सेवा नियमों और न्यायालय के पूर्व निर्णयों के विपरीत प्रतीत होता है।
संघ ने प्रदेश सरकार से अनुरोध किया कि सिविल अपील क्रमांक 1385/2025 में दिए गए निर्णय के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में पुनरीक्षण याचिका दायर की जाए। संघ का कहना है कि अन्य राज्यों की तरह मध्यप्रदेश सरकार भी इस मामले में पहल करे, ताकि शिक्षकों के हितों की रक्षा हो सके।
संघ ने चेतावनी दी कि यदि सरकार द्वारा इस संदर्भ में उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो लगभग तीन लाख शिक्षकों के हित संरक्षण के लिए संगठन स्वयं सर्वोच्च न्यायालय में पुनरीक्षण याचिका दायर करने को बाध्य होगा। इस अवसर पर जिला सचिव हरप्रीत सिंह ग्रोवर ‘लक्की’, प्रदेश मंत्री रजनीश विश्वकर्मा, जिला अध्यक्ष संजय अग्रवाल, सचिव हरप्रीत सिंह लक्की, कोषाध्यक्ष श्रीकांत शुक्ला सहित अरविंद गुप्ता, सुनील मिश्रा, ओमप्रकाश सोनी, प्रमोद मिश्रा, राजेश गुप्ता, रघुवीर रैकवार, रामेश्वर तिवारी, प्रशांत चनपुरिया, राकेश जैन, संजय श्रीवास्तव, प्रताप सिंह राणा, गणेश शंकर गर्ग, रामप्रकाश परौहा, रमाशंकर तिवारी, श्रवण कुमार दत्ता और शेषनाग पाल सहित अनेक कर्मचारी उपस्थित रहे।
