उथले समंदर में दुश्मन की पनडुब्बियों का काल बना ‘मंगरोल’: भारतीय नौसेना में शामिल हुआ अत्याधुनिक युद्धपोत; जानें इसकी ताकत
समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और भारतीय नौसेना की मारक क्षमता में एक और ऐतिहासिक इजाफा हुआ है। तटीय और कम गहराई वाले (उथले) समुद्री क्षेत्रों में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और उनका खात्मा करने में सक्षम अत्याधुनिक युद्धपोत ‘मंगरोल’ को नौसेना में शामिल कर लिया गया है। आधुनिक हथियारों, सेंसरों और उच्च तकनीक से लैस यह पोत विशेष रूप से भारत की तटीय सुरक्षा प्रणाली को अभेद्य बनाएगा। इसका निर्माण कोच्चि स्थित कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा किया गया है।
दुश्मन की पनडुब्बियों की टोह लेने में माहिर
‘मंगरोल’ एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) श्रेणी का तीसरा पोत है। इसे उन कम गहराई वाले तटीय इलाकों के लिए डिजाइन किया गया है, जहां बड़े आकार के युद्धपोतों का संचालन कठिन होता है।
बहुआयामी क्षमता: यह युद्धपोत समुद्री गश्ती विमानों, हेलीकॉप्टरों और अन्य लड़ाकू पोतों के साथ तालमेल बिठाकर काम कर सकता है।
प्रणोदन प्रणाली: तीन शक्तिशाली डीजल इंजनों और वॉटरजेट प्रोपल्शन तकनीक के कारण यह उथले पानी में तेजी से दिशा बदलने और गश्त लगाने में सक्षम है।
विशेष मिशन: यह पानी के भीतर निगरानी, बारूदी सुरंगों (माइन्स) से जुड़े अभियानों और कम तीव्रता वाले समुद्री ऑपरेशन्स को अंजाम देने में पारंगत है।
आधुनिक सोनार और टॉरपीडो से लैस
पानी के भीतर किसी भी गुप्त हलचल को पकड़ने के लिए इसमें उन्नत तकनीकों का एकीकरण किया गया है:
‘अभय’ हल-माउंटेड सोनार: पानी के भीतर छिपे खतरों और पनडुब्बियों की सटीक लोकेशन का पता लगाता है।
स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर व टॉरपीडो: हमले की स्थिति में हल्के टॉरपीडो और एंटी-सबमरीन रॉकेट दागने में सक्षम।
‘मारीच’ टॉरपीडो डिकॉय सिस्टम: दुश्मन द्वारा दागे गए टॉरपीडो को हवा में चकमा देकर पोत की रक्षा करता है।
80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री
भारतीय नौसेना के अनुसार, ‘मंगरोल’ के निर्माण में 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत देश की बढ़ती जहाज निर्माण क्षमता का बेहतरीन उदाहरण है। पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय वत्सायन की मौजूदगी में इसे नौसेना में शामिल किया गया।
गुजरात के ऐतिहासिक बंदरगाह पर नामकरण
इस युद्धपोत का नाम गुजरात के जूनागढ़ जिले के प्रसिद्ध तटीय शहर और मछली पकड़ने वाले प्रमुख बंदरगाह ‘मंगरोल’ के नाम पर रखा गया है। यह नया पोत पूर्ववर्ती आईएनएस मंगरोल (M85) की गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाता है, जिसने अप्रैल 2004 तक माइनकाउंटरमेजर पोत के रूप में देश की सेवा की थी।










