दलित युवती क़े साथ हुए अन्याय क़ो लेकर महिला कांग्रेस ने राज्यपाल क़े नाम सौंपा ज्ञापन

कटनी – दलितों के खिलाफ बढ़ते अत्याचार किसी भी प्रगतिशील और सभ्य समाज के लिए चिंताजनक हैं। मध्य प्रदेश में दलितों के खिलाफ अत्याचार पिछले वर्षों की तुलना में कई गुना बढ़ गए है। सामाजिक न्याय के बड़े-बड़े दावों के बावजूद दलितों के खिलाफ लगातार हिंसा बढ़ रही है।

दलित युवती के साथ हुए अन्याय, उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत
परिवार के साथ हुए अमानवीय व्यवहार की उच्च स्तरीय जांच कराए जाने की मांग

ताजा मामला सागर जिले की तहसील खुरई के बरोदिया नोनागिर गांव का है। यहां भाजपा से जुड़े रसूखदारों और दबंगों के कारण दलितों का जीवनयापन करना कठिन हो गया है। इनके दमन, यौन शोषण, क्रूर व्यवहार, असम्मानजनक एवं अभद्र भाषा की टिप्पणियां, जाति सूचक शब्दों के उपयोग से दलित वर्ग सहमा हुआ है।

डरा हुआ है। इन लोगों का आतंक इतना है कि कोई भी व्यक्ति पुलिस के सामने सच बोलने को तैयार नहीं है। यहीं, सता पक्ष के कथित दबाव में पुलिस का रवैया भी सौतेले जैसा है। दलितों को पुलिस से संरक्षण, न्याय, सुरक्षा, सहानुभूति मिलना तो दूर उल्टे झिड़कियां मिल रही है।

मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस आपके संज्ञान में माना चाहती है कि सागर जिले की खुरई तहसील बरोदिया नोनागिर गांव में अपने चाचा राजेंद्र अहिरवार का (26 मई 2024) रविवार शाम को शव लाते समय एम्बुलेस का गेट खुलने से दलित युवती अंजना अहिरवार की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। यह भीत सामान्य नहीं है। मौत के कारण स्वीकार योग्य नहीं है।

अहिरवार के परिजनों का आरोप है कि राजेंद्र अहिरवार को घर से बुलाकर सरे आम निर्मस तरीके से पहले पीटा गया और वाद ने उसकी हत्या कर दी। वहीं, अंजना इस मामले में मुंबर होकर पुलिस से फरियाद कर रही थी लेकिन उसकी नहीं सुनी गई। उल से उसकी हत्या वार दी गई। मामले में भाजपा से जुड़े रसूखदार और दबंग लोग लीपापोती कर रहे हैं। अजना के पिता रामसेवक तो इतने डरे हुए हैं कि कुछ बोल ही नहीं पा रहे।

संज्ञान में मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस यह भी लाना चाहती है कि अंजना अहिरवार के परिवार में 9 महीने में एक ही परिवार के 3 लोगों की मौत हुई। यह भी स्वाभाविक नहीं थी। इनमें से दो मामले सीधे तौर पर हत्या के है। पुलिस को कोई चश्मदीद भी नहीं मिला। यह भी भाजपा से जुड़े रसूखदार और दबंगों के प्रभाव और उनके आतंक, खौफ को दर्शाता है।

यहां चार दिन पहले राजेंद्र अहिरवार की हत्या हुई है। इस हत्या के बाद गांय के सभी दलितों के घर-घर में ताले लगे हैं। हत्या के बाद गांव के सभी दलित अपनी जान की सुरक्षा के लिए यहां से भाग गए है। नगर पंचायत के रिकॉर्ड के मुताबिक गांव की आबादी 3520 जबकि कुल मतदाता 2150 होना बताया गया है। इसमें 112 परिवार अहिरवार समाज के हैं।

कहने का आशय इतना है कि अब तक आरोपियों की न तो गिरफ्तारी हुई और न ही आरोपियों के घर बुलडोजर पहुंचा। पूरे गांव में दहशत इतनी है कि दलित परिवार के लोग वापस लौटने को तैयार नहीं है। भाजपा के कुछ नेताओं के दबाव में पुलिस है। यह सिर्फ रस्म अदायगी की तरह कार्यवाही करने की बात कह रही है। उल्लेखनीय है कि इसके पहले दमोह जिले के दलित परिवार के तीन सदस्यों की गोली मारकर हत्या कर दी गई, नरसिंहपुर जिले के करेली में एक दलित

महिला की संदिग्ध अवस्था में लाश मिली, पन्ना जिले में अनुसूचित जाति वर्ग के दो मासूम बच्चों की गला रेत कर हत्या कर दी गई. वहीं खंडया में 4 साल की

बच्ची से गैंगरेप का मामला सामने आने के बाद उसे मौत के घाट उतार दिया गया। ये घटनाएं बताती हैं कि प्रदेश में दलित समाज खुद को असुरक्षित समझ रहा है। भारतीय जनता पार्टी से जुड़े लोग निरंकुश होकर दलितों पर अत्याचार कर रहे हैं और पुलिस तमाशबीन की भूमिका में है। आपको यह बताना उचित होगा कि प्रदेश में लगातार दलिल वर्ग पर अत्याचार बढ़ रहे हैं। मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस की मांग है कि दलितों के उत्पीड़न, शोधण और दमन जैसी कार्यवाही को तुरंत रोका जाए। सागर जिले की खुरई तहसील के बरोदिया नोनागिर गांय घटना के आरोपियों को न सिर्फ पकहा जाए बल्कि फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाया जाए ताकि दोषियों को जल्द सजा मिल सके। पीडित परिवार को एक करोड रूपए का मुआवजा दिया जाए। अपनी जान को खतरा देखते हुए गाय छोड़कर चले गए दलितों को पुनः लाकर गांव में ही उनका सम्मानजनक रूप से विस्थापन किया जाए। अगर भाजपा सरकार का दलित विरोधी रवैया बरकरार रहा तो मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस आंदोलन का रास्ता अपनाने की मजबूर होगी। ज्ञापन क़े दौरान महिला कांग्रेस शहर अध्यक्ष रजनी वर्मा माया चौधरी कल्पना पाठक सुमन रजक शशि यादवसरिता कटारे राजा जगवानी वेंकट गट्टानी गिरधारी लाल स्वर्णकार राघव सोनी सहित अन्य कांग्रेस जन शामिल रहेl

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