
Mahadev Satta: ओमान में धरा गया मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर, फर्जी पासपोर्ट से हुआ था फरार; भारत लाने की तैयारी तेज
नई दिल्ली। करीब 6,000 करोड़ रुपये के चर्चित महादेव ऑनलाइन बेटिंग (Mahadev Satta App) सिंडिकेट के कथित मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर (Sourabh Chandrakar) को ओमान में हिरासत में ले लिया गया है। भारतीय जांच एजेंसियों के सूत्रों के हवाले से आई इस बड़ी खबर के मुताबिक, इंटरपोल (Interpol) द्वारा जारी रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर ओमान की रॉयल पुलिस ने यह बड़ी कार्रवाई की है।
इस बड़ी कामयाबी के बाद अब भारत सरकार ने सौरभ चंद्राकर के प्रत्यर्पण (Extradition) की कानूनी प्रक्रिया बेहद तेज कर दी है। चूंकि भारत और ओमान के बीच प्रत्यर्पण संधि (Extradition Treaty) मौजूद है, इसलिए भारतीय सुरक्षा और जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि चंद्राकर को बहुत जल्द भारत लाया जा सकेगा।
फर्जी पासपोर्ट के जरिए यूएई से ओमान भागा था चंद्राकर
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सौरभ चंद्राकर की आखिरी लोकेशन संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में ट्रैक की गई थी। प्रारंभिक जांच में यह बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि वह दक्षिण-पूर्व एशिया (South-East Asia) के किसी देश से बनवाए गए एक फर्जी पासपोर्ट के जरिए यूएई से भागकर ओमान पहुंचा था। भारतीय एजेंसियां अब इस संबंध में ओमान पुलिस से संपर्क कर आधिकारिक पुष्टि और जरूरी दस्तावेज जुटा रही हैं।
दुबई से ऑपरेट हो रहा था 6000 करोड़ का सट्टा साम्राज्य
सौरभ चंद्राकर साल 2019 से ही भारत से फरार चल रहा है。 उसने अपने मुख्य सहयोगी रवि उप्पल के साथ मिलकर दुबई को अपना ठिकाना बनाया और वहीं से ‘महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप’ का एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क खड़ा किया。 यह सिंडिकेट क्रिकेट, फुटबॉल, टेनिस, बैडमिंटन, पोकर, कार्ड गेम से लेकर देश के छोटे-बड़े चुनावी परिणामों तक पर अवैध सट्टा संचालित करता था。
इस महा-घोटाले की जांच इस वक्त प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और छत्तीसगढ़ पुलिस सहित देश की कई बड़ी एजेंसियां मिलकर कर रही हैं। एजेंसियों का दावा है कि यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क है।
ED की चार्जशीट में चौंकाने वाले आंकड़े: रोज का 240 करोड़ का धंधा
ईडी द्वारा कोर्ट में दाखिल की गई चार्जशीट में इस गिरोह के काम करने के तरीके को लेकर कई हैरान करने वाले खुलासे किए गए हैं:
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3,200 बेटिंग पैनल: यह पूरा नेटवर्क देश के अलग-अलग राज्यों और शहरों में करीब 3,200 अवैध सट्टा पैनलों के जरिए चलाया जा रहा था।
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₹240 करोड़ की रोज की कमाई: इस सिंडिकेट के जरिए प्रतिदिन लगभग 240 करोड़ रुपये का अवैध सट्टेबाजी का कारोबार होता था।
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दुबई में 20 आलीशान विला: दुबई में मुख्य हेडक्वार्टर चलाने के लिए लगभग 20 विला किराये पर लिए गए थे, जहां 3,500 से अधिक कर्मचारियों को मोटी सैलरी पर सट्टा ऑपरेट करने के लिए रखा गया था。
पूर्व CM भूपेश बघेल समेत कई वीआईपी जांच के दायरे में
महादेव ऐप का यह दलदल सिर्फ सट्टेबाजों तक सीमित नहीं है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में देश के कई बड़े कारोबारी, नामचीन पुलिस अधिकारी, रसूखदार नौकरशाह और राजनीतिक हस्तियां भी जांच के घेरे में हैं। ईडी की जांच में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का नाम भी आरोपी के रूप में शामिल किया गया है, हालांकि इस पर अंतिम कानूनी फैसला न्यायालय में लंबित है।
2024 में भी पकड़ा गया था, लेकिन…
बता दें कि इससे पहले साल 2024 में भी यूएई (UAE) में इंटरपोल के नोटिस पर चंद्राकर को हिरासत में लिया गया था। उस समय भी भारत सरकार ने उसके प्रत्यर्पण की गुहार लगाई थी, लेकिन तकनीकी और कागजी प्रक्रिया पूरी न होने के कारण उसे बाद में रिहा कर दिया गया था। इस बार एजेंसियां कोई ढील नहीं छोड़ना चाहतीं ताकि इस बड़े गुनहगार को भारतीय कानून के कटघरे में खड़ा किया जा सके।








