Site icon Yashbharat.com

मप्र राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस को सताया ‘क्रॉस वोटिंग’ का डर, 4 विधायकों ने पाला बदला तो हाथ से जाएगी सीट; खुफिया निगरानी शुरू

congress list delhi elections

मप्र राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस को सताया ‘क्रॉस वोटिंग’ का डर, 4 विधायकों ने पाला बदला तो हाथ से जाएगी सीट; खुफिया निगरानी शुरू।  मध्य प्रदेश में आगामी जून महीने में राज्यसभा की तीन सीटें रिक्त होने जा रही हैं, जिसके लिए निर्वाचन आयोग द्वारा जल्द ही अधिसूचना जारी होने की उम्मीद है। लेकिन इस चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस खेमे में भारी घबराहट और चिंता का माहौल है। पार्टी को डर है कि कहीं हिमाचल प्रदेश या अन्य राज्यों की तरह मध्य प्रदेश में भी उसके अपने विधायक ऐन वक्त पर ‘क्रॉस वोटिंग’ न कर दें या मतदान से गायब न हो जाएं।

रोम में गूंजा ‘मोदी-मोदी’, जॉर्जिया मेलोनी ने फोटो पोस्ट कर लिखा- ‘Welcome My Friend’; आज होगी द्विपक्षीय वार्ता

मप्र राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस को सताया ‘क्रॉस वोटिंग’ का डर, 4 विधायकों ने पाला बदला तो हाथ से जाएगी सीट; खुफिया निगरानी शुरू

गणित समझिए: सिर्फ 4 विधायकों की ‘खिड़क’ बिगाड़ देगी खेल

विधायकों के मौजूदा संख्या बल के हिसाब से तीन में से दो सीटें तो सीधे तौर पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खाते में जाना तय है। वर्तमान परिस्थितियों में बची हुई एक सीट तकनीकी रूप से कांग्रेस को मिलनी चाहिए, लेकिन यह रास्ता उतना आसान नहीं है।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, कांग्रेस के पास इस समय बेहद सीमित संख्या बल बचा है। अगर महज चार विधायकों ने भी क्रॉस वोटिंग कर दी, पाला बदल लिया या वे मतदान के दिन अनुपस्थित रह गए, तो कांग्रेस के हाथ से यह इकलौती राज्यसभा सीट भी फिसल जाएगी।

गुपचुप तरीके से विधायकों की ‘किलाबंदी’ और निगरानी शुरू

अन्य राज्यों में कांग्रेस विधायकों द्वारा की गई क्रॉस वोटिंग के कड़वे अनुभवों से सबक लेते हुए, मध्य प्रदेश कांग्रेस के शीर्ष पदाधिकारियों ने अब बेहद सतर्क रुख अपनाया है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार: > प्रदेश नेतृत्व ने गुपचुप तरीके से अपने ही ऐसे विधायकों की लिस्ट तैयार की है, जिनकी वफादारी पर थोड़ा भी संदेह है। पार्टी के कुछ चुनिंदा पदाधिकारियों को ऐसे ‘संदिग्ध’ विधायकों की गतिविधियों, उनके दौरों और भाजपा नेताओं के साथ उनकी मुलाकातों पर पैनी नजर रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

विधायकों की अनुपस्थिति और कोर्ट के फैसलों ने बढ़ाई चुनौती

कांग्रेस की मुश्किलें सिर्फ अंतर्द्वंद्व तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कानूनी और तकनीकी पेंच ने भी उसकी ताकत को कम किया है:

इन दोनों झटकों के बाद कांग्रेस के पास सदन में वोटिंग के लिए बेहद सीमित और नाजुक मार्जिन बचा है। यही वजह है कि भाजपा जहां तीसरी सीट पर भी कांग्रेस को पटखनी देने के लिए अंदरूनी रणनीति बना रही है, वहीं कांग्रेस अपनी ‘साख’ और इकलौती सीट बचाने के लिए अपने ही कुनबे को एकजुट रखने के संघर्ष में जुट गई है।

Exit mobile version