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सरकारी कर्मचारियों को बड़ा तोहफा: मध्य प्रदेश सरकार ने दी 30 फीसदी HRA की सौगात

da hike HRA

HRA ALLOWANCE DA HIKE: सरकारी कर्मचारियों को बड़ा तोहफा: मध्य प्रदेश सरकार ने 30 फीसदी HRA की सौगात दी। मध्य प्रदेश सरकार ने दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों को गृह भाड़ा भत्ता 30 प्रतिशत की दर से देने का निर्णय लिया है। पहले यह भत्ता पांचवें वेतनमान के आधार पर था, अब छठे वेतनमान के अनुसार 30 प्रतिशत लागू होगा।

दिल्ली एवं मुंबई जैसे महानगरों में आवास की समस्या को देखते हुए वहां मध्य प्रदेश सरकार के कार्यालयों में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों को गृह भाड़ा भत्ता 30 प्रतिशत की दर से मिलेगा। वित्त विभाग ने गृह भाड़ा की दर में संशोधन किया है।

महानगरों मे रहने वालों को मिलेगा फायदा
वित्त विभाग ने 19 फरवरी 2007 को दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों में स्थित प्रदेश सरकार के कार्यालयों में कार्यरत राज्य शासन के अधिकारियों-कर्मचारियों को उन्हें मूल वेतन के 30 प्रतिशत की दर से गृह भाड़ा भत्ता स्वीकृत किया था। इसका निर्धारण पांचवें वेतनमान के आधार पर किया गया था।

एक सितंबर 2012 छठवें वेतनमान के अंतर्गत वेतन बैंड में वेतन एवं ग्रेड वेतन के योग का 10 प्रतिशत के आधार पर भाड़ा निर्धारित हुआ। अब यह निर्णय लिया गया है कि यह भत्ता वेतन बैंड में वेतन एवं ग्रेड वेतन के योग के 30 प्रतिशत के आधार पर दिया जाएगा।

सेवानिवृत्त प्रधान आरक्षक को राशि का भुगतान क्यों नहीं : हाई कोर्ट
मप्र हाई कोर्ट ने पुलिस के आला अधिकारियों से पूछा है कि स्पष्ट आदेश के बावजूद सेवानिवृत्त प्रधान आरक्षक को राशि का भुगतान क्यों नहीं किया गया। एक अवमानना प्रकरण में न्यायमूर्ति अवनींद्र कुमार सिंह की एकलपीठ ने प्रमुख सचिव गृह विभाग एसएन मिश्रा, डीजीपी सुधीर सक्सेना और एसपी बैतूल निश्चल झारिया को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

बैतूल के सेवानिवृत प्रधान आरक्षक राजबन गोस्वामी की ओर से अधिवक्ता विकास महावर ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि पूर्व में सेवानिवृत्ति के पश्चात रिकवरी को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के विरुद्ध रिकवरी आदेश निरस्त कर दिया था।

हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग को निर्देश दिए थे कि पात्रता अनुसार याचिकाकर्ता को ब्याज सहित पूरी राशि का भुगतान किया जाए। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने रफीक मसीह के प्रकरण में यह सिद्धांत प्रतिपादित किया है कि सेवानिवृत्ति के बाद रिकवरी नहीं की जा सकती। हाईकोर्ट के आदेश के बाद याचिकाकर्ता ने राशि के भुगतान के लिए विभाग में अभ्यावेदन दिया, लेकिन उसे निरस्त कर दिया गया इसलिए अवमानना याचिका दायर की गई।

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