इंदौर। लॉकडाउन को दो माह से अधिक समय पूरा हो चुका है। कोरोना के असर व संक्रमण से बचाव के लिए सभी दुकानें व होटलें बंद हैं। ऐसे में लोगों की खान-पान संबंधी आदतें बदल चुकी हैं। पहले 35 से 38 प्रतिशत ऐसे मरीज अस्पताल पहुंचते थे, जो खान-पान या मोटापे से ग्रस्त थे। अब पेट संबंधी बीमारियों के 80 प्रतिशत केस डॉक्टरों के पास कम आने लगे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण सभी लोग घर में सामान्य भोजन ही कर रहे हैं जिससे पेट संबंधी कई परेशानियां कम हुई हैं। पेट रोग विशेषज्ञ भी मानते हैं कि बीते दो माह में उनके पास मरीजों के कॉल आने की संख्या काफी कम हुई है। इसका बड़ा कारण लोगों का लॉकडाउन के दौरान घर पर शुद्ध भोजन करना है।
घर पर पोहे, समोसे, कचौड़ी सहित अन्य सामग्री भी बनाई जा रही है। इसके बाद भी पेट संबंधी रोगों में कमी आई है। खाली समय में कई लोग योग व प्राणायाम भी करने लगे हैं। अधिक मोटापा भी कोरोना संक्रमण का कारण गेस्ट्रोलॉजिस्ट डॉ. अजय जैन ने बताया कि इस समय बीमार व्यक्तियों में कोरोना का संक्रमण होने का आशंका भी अधिक रहती है। ऐसे लोग भी संक्रमित हो रहे हैं जिनका वजन सामान्य से अधिक है। मोटे लोग मधुमेहया उच्च रक्तचाप का भी शिकार होते रहते हैं। मोटापा लिवर की बीमारी का भी एक प्रमुख कारण है। इसलिए कोरोना संक्रमण से बचने के लिए स्वस्थ जीवनशैली व मोटापा कम करना जरूरी है।
80 प्रतिशत केस हुए कम
एमवाय अस्पताल के गेस्ट्रोलॉजिस्ट डॉ. अतुल शेंडे ने बताया कि अप्रैल, मई व जून में पेट संबंधी समस्याएं अधिक सामने आती हैं क्योंकि गर्मी के साथ ही लोग घूमने का ज्यादा फायदा उठाते हैं। बाहर हर प्रकार का भोजन व पानी मिलता है जिससे पेट के संक्रमण, पीलिया व फूड पॉइजनिंग की समस्या के केस अधिक आते हैं। लेकिन इस बार इनमें 80 प्रतिशत तक कमी आई है। इसका सबसे बड़ा कारण लॉकडाउन रहा। लोगों के लिए लाइफस्टाइल बदलने का यह अच्छा समय है।
इन आदतों को बदलने का करें प्रयास
फास्ट फूड : बाजार में उपलब्ध फास्ट फूड नूडल्स, पानी बताशे, चाट, पेटिस, पकौड़े, सैंडविच, छोले टिकिया, समोसा, पोहा आदि का नि

