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Location पर खड़े होकर पता लगा सकेंगे कितना है जमीन का दाम

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भोपाल।अगर आप कोई प्रॉपर्टी खरीदने का मन बना रहे हैं या फिर इसकी रजिस्ट्री का दाम पता करना चाहते हैं तो यह खबर आपके लिए है। आप जिस प्रॉपर्टी को खरीदना चाहते हैं, उसकी साइट देखने के समय ही अपने मोबाइल से उस जमीन की असली कीमत का पता लगा सकेंगे। इतना ही नहीं, इसकी रजिस्ट्री में कितना खर्च आएगा, इसका अंदाजा भी मोबाइल ऐप के जरिए लग जाएगा। इसी ऐप के जरिए रजिस्ट्री के लिए स्लॉट भी बुक कर पाएंगे। सब रजिस्ट्रार लोकेशन में हेरफेर कर दाम बढ़ाता है या घटाता है तो उसे भी आप चैलेंज कर पाएंगे। यह ऐप दो से तीन माह में शुरू हो जाएगा।

लगातार हो रहीं फर्जी रजिस्ट्रियों रोकने और जमीन की कीमत जानने के जटिल तरीके को सरल करने के लिए पंजीयन विभाग ऐसा मोबाइल एप तैयार कर रहा है, जिस पर आप संबंधित प्रॉपर्टी की असली कीमत आसानी से जान सकेंगे। बस आपको संबंधित लोकेशन में जाकर खड़े होना है और वहां अपने मोबाइल का जीपीएस ऑन कर पंजीयन विभाग के एप पर जाना होगा। इसके बाद आप जो जानकारी संबंधित जमीन के बारे में जानना चाहते हैं वह आपको आसानी से उपलब्ध हो जाएगी। इधर, प्रॉपर्टी में लगने वाले टैक्स के कैलकुलेशन की प्रक्रिया को भी सरल किया जा रहा है।

इसलिए की जा रही है व्यवस्था

पिछले दिनों पंजीयन विभाग की रजिस्ट्रियों में गड़बड़ी पाई गई थीं। जब बड़े स्तर पर जांच हुई तो सामने आया कि कॉलोनाइजर टीएंडसीपी से डुप्लेक्स बनाने के लिए प्रोजेक्ट अप्रूव करा लेते हैं, लेकिन प्रॉपर्टी के खरीदार और कॉलोनाइजर आपसी सहमति से डुप्लेक्स की जगह प्लॉट की रजिस्ट्री करा लेते हैं। इतना ही नहीं कई रजिस्ट्री में प्लॉट की लोकेशन ही सही नहीं पाई गई। कुछ रजिस्ट्री तो ऐसी भी पाई गईं, जिनका कोई आधार ही नहीं था। इन बिंदुओं पर रिपोर्ट पेश होने के बाद महानिरीक्षक पंजीयन ने देखा कि इससे सरकार को लगातार राजस्व का नुकसान हो रहा है। इस नुकसान को रोकने और आम जनता को पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए यह सुविधा दी जा रही है।

– वेंडर और एजेंट के चक्कर में रजिस्ट्री के ज्यादा पैसे आम जनता को नहीं चुकाने पड़ेंगे।

– फर्जी रजिस्ट्रियों पर रोक लगेगी।

टीएंडसीपी से अप्रूव है या नहीं, यह भी पता चल जाएगा।

– टैक्स और कैलकुलेशन की जानकारी मिलेगी।

प्लानिंग चल रही है

आज हर व्यक्ति के हाथ में मोबाइल है। इसलिए ऐसी तैयारी की जा रही है कि कोई भी व्यक्ति किसी भी लोकेशन में अपना मोबाइल लेकर जाए तो उसे उस प्रॉपर्टी की कीमत का पता चल जाए। फिलहाल इस तरह की व्यवस्था की प्लानिंग की जा रही है। -अमित राठौर, महानिरीक्षक पंजीयन, मप्र

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