आईए जानते हैं मंकीपॉक्स बीमारी का भारत में कितना गंभीर है खतरा?

मंकीपॉक्स क्या है?

मंकीपॉक्स एक दुर्लभ लेकिन गंभीर वायरल बीमारी है, जो मानव में जानवरों से फैलती है। इस वायरस का संबंध चेचक से है, लेकिन यह चेचक की तुलना में कम घातक होता है। मंकीपॉक्स पहली बार 1958 में बंदरों में पाया गया था, जिसके बाद यह मानव में भी देखा गया।

मंकीपॉक्स के लक्षण

मंकीपॉक्स के लक्षण आमतौर पर संक्रमण के 7 से 14 दिनों के बाद दिखाई देते हैं। इनमें बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, पीठ में दर्द, सूजी हुई लिम्फ नोड्स, ठंड लगना, और थकान शामिल हैं। इसके बाद चेहरे, हाथ, और शरीर के अन्य हिस्सों में दाने उभरते हैं जो बाद में फफोले का रूप ले लेते हैं।

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कैसे फैलता है मंकीपॉक्स?

मंकीपॉक्स मुख्य रूप से जानवरों से मनुष्यों में फैलता हैं। यह संक्रमित जानवरों के काटने, खरोंचने, उनके शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क में आने से फैलता है। इसके अलावा, संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से भी मंकीपॉक्स फैल सकता है।

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बचाव के उपाय

स्वच्छता बनाए रखें: अपने हाथों को साबुन और पानी से नियमित रूप से धोएं।
संक्रमित लोगों से दूर रहें: मंकीपॉक्स के लक्षणों वाले व्यक्तियों से दूर रहें और यदि आप किसी संक्रमित व्यक्ति की देखभाल कर रहे हैं, तो मास्क और ग्लव्स पहनें।
जानवरों से बचाव: जंगली जानवरों के संपर्क में आने से बचें, खासकर बंदरों और चूहों जैसे जानवरों से।
त्वचा के घावों को कवर करके रखें, स्वस्थ आहार लें और भरपूर पानी पिएं।

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