प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शासकीय तिलक स्नातकोत्तर महाविद्यालय में गुरु पूर्णिमा एवं मानसिक स्वास्थ्य पर व्याख्यानमाला आयोजित

प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शासकीय तिलक स्नातकोत्तर महाविद्यालय में गुरु पूर्णिमा एवं मानसिक स्वास्थ्य पर व्याख्यानमाला आयोजि
कटनी। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शासकीय तिलक स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कटनी में बुधवार को भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ एवं नेशनल टास्क फोर्स के संयुक्त तत्वावधान में गुरु पूर्णिमा पर्व एवं मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. डॉ. सुनील कुमार वाजपेई की अध्यक्षता में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं वंदना के साथ हुआ। इसके पश्चात अतिथियों का स्वागत किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में सेवानिवृत्त प्राध्यापक (अर्थशास्त्र) डॉ. लक्ष्मी नायक उपस्थित रहीं। वहीं जिला चिकित्सालय से स्वास्थ्य विभाग की टीम ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्राचार्य प्रो. डॉ. सुनील कुमार वाजपेई ने गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि माता-पिता के बाद गुरु ही ऐसा व्यक्तित्व होता है, जो अपने शिष्यों को सफलता के शिखर पर पहुंचते देखकर सबसे अधिक प्रसन्न होता है। उन्होंने विद्यार्थियों से जीवन में एक श्रेष्ठ गुरु का मार्गदर्शन अवश्य प्राप्त करने का आग्रह किया।
मुख्य अतिथि डॉ. लक्ष्मी नायक ने अपने संबोधन की शुरुआत संत कबीरदास के प्रसिद्ध दोहे— “गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पाय। बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय।” —से करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊंचा माना गया है, क्योंकि गुरु ही जीवन को सही दिशा प्रदान करता है।
इस अवसर पर जिला चिकित्सालय की स्वास्थ्य विभाग की टीम ने विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करते हुए मानसिक रोगों के लक्षण, उनसे बचाव के उपाय तथा समय पर पहचान के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए ‘मनहित ऐप’ के उपयोग एवं उसके लाभों से भी विद्यार्थियों को अवगत कराया गया।
कार्यक्रम का संचालन हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. माधुरी गर्ग ने किया। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और महर्षि सांदीपनि के गुरु-शिष्य संबंध का उल्लेख करते हुए कहा कि ज्ञान, संस्कार और व्यक्तित्व निर्माण में गुरु की भूमिका सर्वोपरि होती है।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकगण, शैक्षणिक स्टाफ तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की उपस्थिति रही।








