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कटनी न्यूज: कुठला के अपराध क्रमांक 738/2026 में तीन आरोपियों के गिरफ्तारी वारंट तत्काल प्रभाव से निरस्त वारंट, निरस्तीकरण के साथ एसआईटी निरीक्षक को कारण बताओ नोटिस

कटनी न्यूज । थाना कुठला में दर्ज अपराध क्रमांक 738/2026 के मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी मनीषा जैन तिवारी की अदालत ने 18 सितंबर 2026 को जारी तीन आरोपियों के गिरफ्तारी वारंट तत्काल प्रभाव से निरस्त करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने प्रकरण में पूर्व में सत्र न्यायालय द्वारा वारंट संबंधी आवेदन निरस्त किए जाने के तथ्य का उल्लेख करते हुए एसआईटी जबलपुर के निरीक्षक चन्द्रकांत झा को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

न्यायालय के आदेश के अनुसार एसआईटी जबलपुर की ओर से इसी अपराध में आरोपियों के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी किए जाने का आवेदन 1 सितंबर 2026 को सत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था, जिसे 2 सितंबर को निरस्त कर दिया गया था। इसके बाद फरियादी की ओर से भी आरोपियों के विरुद्ध वारंट जारी करने का आवेदन प्रस्तुत किया गया, जिसे 16 सितंबर को निरस्त कर दिया गया।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि उक्त तथ्यों का उल्लेख किए बिना एसआईटी जबलपुर के निरीक्षक द्वारा इस न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत कर आरोपियों की गिरफ्तारी के वारंट जारी कराए गए। न्यायालय ने कहा कि पूर्व में सत्र न्यायालय द्वारा आवेदन निरस्त किए जाने के बाद इस न्यायालय के पास वारंट जारी करने का क्षेत्राधिकार नहीं था। इसी आधार पर 18 सितंबर को जारी वारंट को निरस्त करते हुए तत्काल वापस किए जाने के निर्देश दिए गए।

निरीक्षक को नोटिस, वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना के निर्देश

अदालत ने एसआईटी जबलपुर के निरीक्षक चन्द्रकांत झा को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि न्यायालय के समक्ष पूर्व की कार्यवाही के तथ्यों का उल्लेख नहीं किए जाने के संबंध में उनके विरुद्ध कार्रवाई के लिए वरिष्ठ अधिकारी एवं उच्च न्यायालय को सूचना क्यों न दी जाए।

न्यायालय ने आदेश की सूचना एसआईटी जबलपुर और संबंधित थाने के ई-मेल पर भेजने तथा प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश को भी अवगत कराने के निर्देश दिए हैं। वारंट की वापसी एवं आगामी कार्यवाही के लिए प्रकरण की पत्रावली 25 सितंबर 2026 को प्रस्तुत की जाएगी।

प्रकरण में जिन तीन आरोपियों के विरुद्ध 18 सितंबर को गिरफ्तारी वारंट जारी हुए थे, उनमें नेहा पच्चीसिया, क्षितिजराज बारापात्रे और मारूफ अहमद हनफी के नाम शामिल हैं। मामला भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धाराओं के तहत दर्ज है।

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