कटनी(YASHBHARAT.COM)। मध्यप्रदेश में रेल नेटवर्क को मजबूत करने के लिए शुरू की गई कटनी–बीना तीसरी रेल लाइन परियोजना अब अपने अंतिम चरण में है। कुल 263 किलोमीटर लंबी इस परियोजना में 32 स्टेशन शामिल हैं। इसमें से अब तक 235 किलोमीटर का कार्य पूरा हो चुका है और मात्र 28 किलोमीटर का काम शेष है। रेल मंत्रालय ने सोशल मीडिया के माध्यम से यह जानकारी साझा की है।
परियोजना की शुरुआत और देरी
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत वर्ष 2016 में हुई थी। इसे 2022 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन तकनीकी दिक्कतों, ठेकेदार संबंधी समस्याओं और प्रशासनिक देरी के चलते समय पर काम पूरा नहीं हो सका। परियोजना की धीमी रफ्तार को लेकर कई बार सवाल उठे और लापरवाही की शिकायतें भी सामने आईं।
बजट और प्रगति पर एक नजर
रेलवे मंत्रालय के हालिया अपडेट के अनुसार, पश्चिम मध्य रेलवे को 2024-25 के बजट में इस परियोजना के लिए 350 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। बजट मिलने के बाद कार्य की रफ्तार बढ़ी है और अब शेष 25 किमी कार्य भी अंतिम चरण में है।
परियोजना पूरी होने से मिलेगा लाभ
इस परियोजना के पूरा होने के बाद मध्यप्रदेश को अनेक लाभ मिलेंगे—
- क्षेत्रीय विकास: सागर, दमोह और कटनी जिलों में सामाजिक-आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।
- ऊर्जा आपूर्ति: विद्युत संयंत्रों तक कोयले की समयबद्ध आपूर्ति संभव होगी, जिससे बिजली उत्पादन प्रभावित नहीं होगा।
- यातायात क्षमता: कटनी–बीना रेल खंड पर ट्रेन यातायात क्षमता बढ़ेगी, भीड़भाड़ कम होगी और यात्रियों का यात्रा समय घटेगा।
- उद्योगों को लाभ: कोयला, खनिज और औद्योगिक वस्तुओं की ढुलाई में तेजी आएगी, जिससे औद्योगिक क्षेत्र को मजबूती मिलेगी।
चुनौतियां और प्रभाव
निर्माण कार्य में देरी के चलते यात्रियों को असुविधा झेलनी पड़ी है। रेलवे को कई बार कुछ ट्रेनों के रूट बदलने और सेवाएँ रद्द करने तक के कदम उठाने पड़े ताकि काम की गति तेज़ की जा सके। हालांकि अब रेलवे का कहना है कि कार्य तेज़ रफ्तार से जारी है और जल्द ही पूरा हो जाएगा।
वर्तमान स्थिति: 90% से अधिक कार्य पूरा
रेल मंत्रालय ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी साझा करते हुए कहा कि परियोजना का 90% से अधिक कार्य पूरा हो चुका है। अब सिर्फ 28 किमी का निर्माण कार्य बाकी है। रेलवे अधिकारियों का दावा है कि इसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।
विकास की नई राह
कटनी–बीना तीसरी रेल लाइन परियोजना न केवल मध्यप्रदेश की रेल कनेक्टिविटी और परिवहन दक्षता को बढ़ाएगी, बल्कि यात्रियों, उद्योगों और ऊर्जा क्षेत्र—सभी को प्रत्यक्ष लाभ देगी। यह परियोजना पूरे बुंदेलखंड और महाकौशल क्षेत्र के लिए विकास की नई राह खोलने वाली साबित होगी।

