कटनी। प्रशासन व पुलिस की अनदेखी के चलते जिले भर में सूदखोरों का नेटवर्क फैलता जा रहा है। खासकर शहर व उसके आसपास उपनगरीय क्षेत्रों में तो सूदखोरों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि सरकार से भरपूर पेंशन मिलने के बावजूद लोग अपना घर खर्च और उपचार तक ठीक से नहीं करा पा रहे हैं और बेवस व लाचारी का जीवन जीने मजबूर हैं।
ऐसा ही एक मामला आज एनकेजे थाना अंतर्गत रोशननगर क्षेत्र में प्रकाश में आया है। जहां सूदखारों से परेशान एक महिला रेखा पति स्वर्गीय बसंत जॉनसन इतनी सहाय व लाचार हो गई कि भरपूर पेंशन मिलने के बावजूद वह अपना उपचार नहीं करा पाई और मकान के अंदर ही लगातार अस्वस्थता के कारण बिस्तर में लेटे-लेटे कोमा में चली गई। आज सुबह जब काफी देर तक महिला घर से बाहर निकली और उसके मकान के दरवाजे भी नहीं खुले तो लोग किसी अनहोनि को लेकर आसंकित हो गए।
लिहाजा वार्ड पार्षद मनोज गुप्ता, शिवप्रताप सिंह, राजेश चावरे, राजेश शान भाई, आशा भदौरिया, राजू जायसवाल, अर्जुन अहिरवार, चोखे भाईजान, सुनील श्रीवास, साक्षीगोपाल साहू सहित भारी संख्या में लोग महिला के मकान के सामने एकत्रित हो गए। दरवाजा काफी खटखटाने पर जब अंदर से कोई आवाज नहीं आई तो सूचना पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही एनकेजे पुलिस मौके पर पहुंची। जिसके बाद मकान का दरवाजा काटा गया और जैसे ही लोग अंदर पहुंचे तो उनकी आंखे फटी की फटी रह गई।
मकान के अंदर बिस्तर पर वृद्ध पेंशनर रेखा असहाय कोमा की स्थिति में पड़ी हुई थी। बताया जाता है कि रेखा जॉनसन के कोई आल औलाद नहीं है तथा उनके पति रेलवे में नौकरी करते थे। पति की मौत के बाद रेलवे की पेंशन उनको मिलती है, जो घर खर्च सहित उपचार कराने के लिए पर्याप्त है लेकिन उनके पति के द्धारा लिया गया कर्जा व उसका ब्याज अभी तक सूदखोर वसूल रहे हैं।
सूदखोरों के द्धारा मोटा ब्याज व उसका स्याज वसूल रहे हैं। जिसके कारण रेखा को भरपूर पेंशन मिलने के बावजूद उसकी पूरी पेंशन सूदखोर चट कर जाते हैं। जिसके कारण रेखा जैसी कई वृद्ध महिला व पुरूष पेंशनर लाचारी का जीवन जीने मजबूर हैं। बहरहाल आज लोगों की जागरूकता के कारण रेखा जॉनसन की जान बच गई लेकिन उसकी पूरी जान तभी वापस लौटेगी जब पुलिस रेखा को परेशान करने वाले सूदखोर के विरूद्ध कार्रवाई करेगी।
निर्माणी व एनकेजे में सूदखोरों का दबदबा
उल्लेखनीय है कि शहर के आयुध निर्माणी व एनकेजे क्षेत्र में सबसे ’यादा सूदखोरी का धंधा चलता है। बताया जाता है कि यहां सूदखोरी का काम करने वाले लोग संबंधित बैंक अधिकारियों से सांठगांठ कर वृद्ध महिला व पुरूष पेंशनरों के बैंक की पासबुक व एटीएम तक अपने पास जप्त रखते हैं और महिने की निर्धारित तारीख को खाते में पेंशन आते ही पेंशनरों को ले जाकर अपना ब्याज और उसका स्याज वसूलते हैं और बची कुची रकम पेंशनर को देकर पासबुक व एटीएम फिर अपने पास रख लेते हैं। जिसका परिणाम है कि आयुध निर्माणी व एनकेजे के कई ऐसे वृद्ध महिला व पुरूष पेंशनर ऐसे हैं। जिनकों भरपूर पेंशन मिलने के बाद वो लाचारी का जीवन जीने मजबूर हैं।
सूदखोरों के विरूद्ध शुरू हो अभियान
गौरतलब है कि पूर्व में कई बार सूदखोरों के विरूद्ध अभियान चलाकर कार्रवाई की गई। जिसके बाद सूदखोरी के धंधे में कुछ कमी आई लेकिन पिछले लंबे समय से सूदखारों की ओर ध्यान न दिए जाने के कारण शहर में एक बार फिर सूदखोरी का धंधा फलने व फूलने लगा है और इसका सबसे ’यादा असर आयुध निर्माणी व एनकेजे क्षेत्र में देखा जा रहा है। जहां सूदखारों के पकड़जाल में फंसे कई निर्माणी व रेलवे कर्मचारियों व वृद्ध महिला व पुरूष पेंशनरों की बैंक पासबुक व एटीएम सूदखारों के पास जप्त रखी हुईं हैं। इसलिए एक बार फिर सूदखोरों के विरूद्ध अभियान चलाकर कार्रवाई की जरूरत है।

