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जस्टिस बी.आर. गवई होंगे देश के 52वें मुख्य न्यायाधीश, 14 मई को लेंगे शपथ

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जस्टिस बी.आर. गवई होंगे देश के 52वें मुख्य न्यायाधीश, 14 मई को लेंगे शपथ। जस्टिस बीआर गवई भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यभार ग्रहण करेंगे. वह 14 मई को इस पद की शपथ लेंगे, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा दिलाया जाएगा. वर्तमान मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना 13 मई को रिटायर होंगे, और उसके अगले दिन जस्टिस गवई अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन शुरू करेंगे. CJI न्यायमूर्ति संजीव खन्ना ने नवंबर 2024 में पदभार संभाला था.

परंपरा के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश ने न्यायमूर्ति गवई को अपने उत्तराधिकारी के रूप में नामित करते हुए केंद्रीय विधि मंत्रालय को एक प्रस्ताव भेजा है. मंत्रालय ने पहले मुख्य न्यायाधीश से उनके उत्तराधिकारी के नाम की मांग की थी. न्यायमूर्ति गवई लगभग छह महीने तक भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्य करेंगे, क्योंकि वे नवंबर में सेवानिवृत्त होने वाले हैं. वे न्यायमूर्ति केजी बालकृष्णन के बाद मुख्य न्यायाधीश का पद संभालने वाले दूसरे दलित न्यायाधीश होंगे, जिन्हें 2007 में इस उच्चतम न्यायिक पद पर पदोन्नत किया गया था.

6 महीने तक रहेंगे भारत के मुख्य न्यायाधीश

न्यायमूर्ति गवई लगभग छह महीने तक भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्य करेंगे, क्योंकि उनकी सेवानिवृत्ति नवंबर में निर्धारित है. वे न्यायमूर्ति केजी बालकृष्णन के बाद मुख्य न्यायाधीश का पद संभालने वाले दूसरे दलित न्यायाधीश हैं, जिन्हें 2007 में इस प्रतिष्ठित पद पर नियुक्त किया गया था.

कौन हैं भूषण रामकृष्ण गवई ?

महाराष्ट्र के अमरावती से संबंधित गवई ने 1985 में वकील के रूप में अपने करियर की शुरुआत की और महाराष्ट्र उच्च न्यायालय के पूर्व महाधिवक्ता तथा न्यायाधीश बैरिस्टर राजा भोंसले के साथ कार्य किया. इसके बाद, उन्होंने 1987 से 1990 तक बॉम्बे उच्च न्यायालय में स्वतंत्र रूप से वकालत की. इसके पश्चात, उन्होंने मुख्य रूप से संवैधानिक और प्रशासनिक कानून से जुड़े मामलों में बॉम्बे उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ में प्रैक्टिस की.

उन्हें अगस्त 1992 में बॉम्बे उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ में सहायक सरकारी वकील और अतिरिक्त लोक अभियोजक के रूप में नियुक्त किया गया. 2000 में, उन्हें नागपुर पीठ के लिए सरकारी वकील और लोक अभियोजक के पद पर नामित किया गया.

न्यायमूर्ति गवई 2003 में उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश बने और 2005 में उन्हें स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया. 2019 में, उन्हें सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के पद पर पदोन्नति मिली.

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