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कटनी जिले के 160 गांवों में एक दिन में चला जल गंगा संवर्धन महाअभियान

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कटनी जिले के 160 गांवों में एक दिन में चला जल गंगा संवर्धन महाअभियान

गंगा दशहरा पर प्रस्फुटन समितियों ने किया जल स्रोतों का पूजन, श्रमदान, कलश यात्रा व जल शपथ का आयोजन

 

कटनी – मध्य प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आह्वान पर एवं जिला प्रशासन के निर्देशानुसार, मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के मार्गदर्शन में पूरे कटनी जिले में जल संरक्षण का ऐतिहासिक आयोजन किया गया। गंगा दशहरा के पावन अवसर पर जिले के सभी 6 विकासखंडों के 160 ग्रामों में एक ही दिन एक साथ “जल गंगा संवर्धन अभियान” चलाया गया।

 

19 मार्च से 30 जून तक संचालित इस राज्यव्यापी अभियान के अंतर्गत जन अभियान परिषद द्वारा नवांकुर संस्थाओं, ग्राम विकास प्रस्फुटन समितियों, मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास कार्यक्रम के परामर्शदाताओं एवं छात्र-छात्राओं के सहयोग से गांव-गांव में विविध गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं।

 

गंगा दशहरा पर हुए मुख्य आयोजन

गंगा दशहरा के उपलक्ष्य में 160 ग्रामों में एक साथ भजन-कीर्तन, जल स्रोतों का विधि-विधान से पूजन, कुओं-बावड़ियों-तालाबों के आसपास श्रमदान द्वारा साफ-सफाई, जलाभिषेक, जल संवाद, जल संरक्षण की शपथ एवं भव्य कलश यात्राओं का आयोजन किया गया। ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और जल को जीवन का आधार मानकर उसके संरक्षण का संकल्प लिया।

 

सुनियोजित कार्ययोजना से मिली सफलता:

मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद, भोपाल द्वारा माननीय मुख्यमंत्री जी के मार्गदर्शन में अभियान की विशेष कार्ययोजना तैयार की गई थी। जिसका कैलेंडर स्वयं मुख्यमंत्री जी द्वारा विमोचित किया गया था। जिला समन्वयक डॉ. तेज सिंह केशवाल के नेतृत्व में सभी 6 विकासखंड समन्वयकों – बालमुकुंद मिश्र, अरविंद शाह, जगन सिंह मसराम, बबीता शाह, आरती गुप्ता और नंदिनी वाटिया ने नवांकुर संस्थाओं के समन्वय से गांव-गांव में बैठकें कर कार्यक्रम का समय, स्थान एवं समन्वयक तय किए।

 

स्थानीय ग्राम विकास प्रस्फुटन समितियों के सक्रिय सहयोग से सभी कार्यक्रमों को मूर्त रूप दिया गया, जिसका परिणाम आज 160 ग्रामों में एक साथ हुए इस वृहद आयोजन के रूप में सामने आया।

 

जनभागीदारी बनी मिसाल

इस जिला स्तरीय महाअभियान में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, नवांकुर संस्थाओं, प्रस्फुटन समितियों, बीएसडब्ल्यू-एमएसडब्ल्यू के छात्र-छात्राओं एवं परामर्शदाताओं की सक्रिय भागीदारी रही। सभी ने एक स्वर में “जल है तो कल है” का संदेश दिया।

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