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Jai Ram Mandir: 5 लाख मंदिरों में एक साथ होगी पूजा, हर जाति के लोगों को शामिल कर विश्व हिंदू परिषद तोड़ेगी जातिगत बाधा

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Jai Ram Mandir: 5 लाख मंदिरों में एक साथ होगी पूजा, हर जाति के लोगों को शामिल कर विश्व हिंदू परिषद तोड़ेगी जातिगत बाधा।बअयोध्या में बन रहे राम मंदिर का सजीव प्रसारण देश के पांच लाख छोटे-बड़े मंदिरों में एक साथ किया जाएगा। इसमें हिंदुओं के हर समुदाय के मंदिर शामिल होंगे।

इसके लिए अभी से संत रविदास मंदिर, कबीर मंदिर, भगवान वाल्मीकि मंदिर, नाथ संप्रदाय के मंदिर और अन्य समुदायों के मंदिरों के प्रमुखों से बातचीत की जा रही है। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) का लक्ष्य है कि राम मंदिर उद्घाटन के जरिये हिंदू समुदायों को एक दूसरे के करीब लाया जाए और जातिगत सोच को समाप्त करने का प्रयास किया जाए।

 

राम मंदिर से जायेगा राम का संदेश

विहिप के संयुक्त महासचिव डॉ. सुरेंद्र जैन ने अमर उजाला को बताया कि भगवान राम के जीवन का एक सबसे बड़ा संदेश यही है कि हर समाज के लोगों को साथ लेकर आगे चलने से ही विजय मिलती है। लेकिन राजनीतिक स्वार्थवश कुछ राजनीतिक दल और कुछ नेता हिंदू समाज को जातियों में बांटने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे समय में हिंदू समाज को एक करने की आवश्यकता बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि उद्घाटन के दिन राम मंदिर से ही यह संदेश जाना चाहिए कि पूरा हिंदू समाज एक है और वे इसी के लिए प्रयास कर रहे हैं।

पहले भी सफल रहा था प्रयोग

डॉ. सुरेंद्र जैन के अनुसार इसके पहले जब पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह ने जातिगत आरक्षण लागू कर हिंदू समुदाय को विभिन्न जातियों में बांटने की कोशिश की थी, उस समय भी विहिप ने चरण पादुका पूजन कार्यक्रम चलाया था। इस कार्यक्रम से देश के हर समाज, हर जाति के लोग जुड़े और जातिगत दूरी को कम करने में मदद मिली। इसी प्रकार कुछ समय पहले राम मंदिर निर्माण के लिए समर्पण निधि अभियान की शुरुआत की गई। इस कार्यक्रम से भी देश के करोड़ों हिंदू परिवार जुटे और जातिगत दूरी पीछे रह गई। उन्होंने कहा कि जब-जब राम की बात आती है, पूरा देश जातिगत दूरियों को भूलकर एक हो जाता है। विहिप राम नाम की इसी शक्ति के सहारे हिंदू समुदाय की सबसे बड़ी कमजोरी को दूर करने की कोशिश करेगी।

क्या भाजपा की आवश्यकता है ये प्रयोग?

भाजपा 2024 में लगातार तीसरी बार केंद्र की सत्ता में आने की तैयारी कर रही है। विपक्ष के जातिगत जनगणना और ओबीसी समुदाय की भागीदारी के दांव से भाजपा की राह मुश्किल हुई है। यह उसके लक्ष्य को हासिल करने में बड़ी बाधा भी बन सकता है। भगवा खेमे के आलोचकों का कहना है कि राम मंदिर के उद्घाटन के जरिये भाजपा विपक्ष के इसी हमले से बचने की काट खोज रही है।

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