एल्गिन में आयुष्मान कार्ड लागू नहीं: डेंगू की चपेट में आने वाले गरीब मरीजों के स्वजन की परेशानी बढ़ गई है। सरकारी व निजी अस्पतालों में उन्हें निजी स्तर पर प्लेटलेट की व्यवस्था करने के लिए कहा जाता है।
विक्टोरिया अस्पताल में मशीनें ठप पड़ी हैं परंतु एल्गिन अस्पताल के ब्लड बैंक में प्लेटलेट का निर्माण किया जा रहा है। मरीजों को खून की अदलाबदली किए बगैर 300 रुपये में प्लेटलेट दिया जा रहा है।
जबकि निजी केंद्रों में प्लेटलेट के लिए दोगुना से भी ज्यादा रकम ली जा रही है। एल्गिन में सिंगल डोनर प्लेटलेट भी दिया जा रहा है। जिसकी दर 10 हजार 500 रुपये निर्धारित की गई है। निजी केंद्रों में सिंगल डोनर प्लेटलेट के लिए 12-15 हजार रुपये लिए जाते हैं। परंतु एल्गिन अस्पताल में आयुष्मान योजना का कार्ड लागू न होने के कारण जरूरतमंद मरीजों के स्वजन को अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है।
एक यूनिट से बचा सकते हैं कई जान: एक यूनिट खून से चार मरीजों की जान बचाई जा सकती है। ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर से एक यूनिट ब्लड से लाल रक्त कणिकाएं आरबीसी, श्वेत रक्त कणिकाएं डब्ल्यूबीसी, प्लेटलेट्स प्लाज्मा, फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा एफएफपी को अलग किया जाता है। रक्त के इन घटकों को कई दिन तक सुरक्षित रखा जा सकता है। विक्टोरिया की यूनिट में दो फ्रीजर, ब्लड सेपरेटर, डीप फ्रीजर, कंपोनेंट मशीन, एजिटेटर, बैलेंस मशीन दी गई है। विक्टोरिया में उक्त यूनिट के बंद रहने से थैलीसीमिया पीडि़त बच्चों को खून का पैक्ड सेल घटक नहीं मिल पा रहा है।
ऐसे समझें उपयोग-
-रक्तअल्पता का शिकार मरीजों के खून में हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है। इसलिए उन्हें आरबीसी च़ढाया जाता है।
-डेंगू से पीडि़त मरीजों के रक्त में प्लेटलेट की कमी हो जाती है।रक्त से प्लेटलेट निकालकर चढ़ाया जाता है।
-आग से जले या हार्ट अटैक के मरीजों को प्लाज्मा की आवश्यकता होती है। खून से प्लाज्मा अलग किया जा सकता हैं
-थैलीसीमिया सिकलसेल से पीडि़त मरीजों को पैक सेल दिया जाता है।
-रक्त के ये सभी घटक एक यूनिट रक्त में मौजूद रहते हैं। जिन्हें अलग-अलग कर संबंधित आवश्यकता वाले मरीजों की जान बचाई जाती हैं