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जबलपुर-मानिकपुर-इटारसी रेलखंड: बढ़ती ट्रेनों के बीच तीसरी लाइन की दरकार, आउटर पर अटक रही रफ्तार

Indian Railway: 40 साल बाद बदलेगा रेलवे का सिस्टम, खत्म होगी ‘Server Down’ की टेंशन-1 मिनट में बुक होंगे 1.5 लाख टिकट, बदलेगा 40 साल पुराना सिस्टम

Indian Railway: 40 साल बाद बदलेगा रेलवे का सिस्टम, खत्म होगी ‘Server Down’ की टेंशन-1 मिनट में बुक होंगे 1.5 लाख टिकट, बदलेगा 40 साल पुराना सिस्टम

जबलपुर-मानिकपुर-इटारसी रेलखंड: बढ़ती ट्रेनों के बीच तीसरी लाइन की दरकार, आउटर पर अटक रही रफ्तार

जबलपुर: जबलपुर रेल मंडल से जुड़ने वाले विभिन्न रेलखंडों पर भले ही मल्टीट्रैकिंग (रेल लाइनों के विस्तार) के कार्यों में तेजी आई हो, लेकिन मानिकपुर-जबलपुर-इटारसी का बेहद महत्वपूर्ण रेलमार्ग अब भी अपनी तीसरी लाइन की अंतिम स्वीकृति का इंतजार कर रहा है।

करीब 519 किलोमीटर लंबा यह रेलखंड वर्तमान में दोहरी लाइन (डबल ट्रैक) पर संचालित हो रहा है। अत्यधिक यातायात वाले इस रूट पर रोजाना औसतन दो दर्जन से अधिक यात्री ट्रेनें और भारी संख्या में मालगाड़ियां दौड़ती हैं।

बढ़ती क्षमता और बुनियादी ढांचे की चुनौती

तीसरी लाइन क्यों है जरूरी?

  1. परिचालन में तेजी: तीसरी लाइन का निर्माण पूरा होने से मालगाड़ियों और एक्सप्रेस ट्रेनों का यातायात अलग-अलग सुचारू रूप से संचालित हो सकेगा।

  2. आउटर की समस्या से मुक्ति: ट्रेनों को आउटर पर रोकने की नौबत कम होगी, जिससे ट्रेनों की पंक्चुअलिटी (समयबद्धता) में बड़ा सुधार आएगा।

  3. भविष्य की जरूरत: आने वाले समय में नए रूट्स और अतिरिक्त ट्रेनों के दबाव को संभालने के लिए इस 519 किमी लंबे ट्रैक का विस्तार अत्यंत आवश्यक माना जा रहा है।

स्थिति: रेल प्रशासन की ओर से प्रस्ताव प्रक्रियाधीन है, हालांकि यात्रियों और क्षेत्रवासियों को योजना को जल्द से जल्द अंतिम हरी झंडी मिलने का इंतजार है।जबलपुर-मानिकपुर-इटारसी रेलखंड: बढ़ती ट्रेनों के बीच तीसरी लाइन की दरकार, आउटर पर अटक रही रफ्तार

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