Tuesday, May 26, 2026
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Jabalpur High Court news: हाइकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा- झोलाछाप के खिलाफ अब तक क्या ठोस कार्रवाई की

जबलपुर । Jabalpur High Court news: हाइकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा- झोलाछाप के खिलाफ अब तक क्या ठोस कार्रवाई की मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने राज्य शासन से पूछा है कि अनाधिकृत रूप से एलोपैथी से इलाज कर रहे अन्य पद्धति से प्रशिक्षित झोलाछाप के खिलाफ अब तक कौन सी ठोस कार्रवाई की गई है? कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश संजय यादव व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने यह भी पूछा कि झोलाछाप पर अंकुश लगाने के लिए सरकार के प्रस्तावित कदम क्या हैं? कोर्ट ने चार जनवरी तक इस सम्बंध में स्टेटस रिपोर्ट मांगी।

28 चिकित्सकों द्वारा एलोपैथी से इलाज करने की शिकायत: जबलपुर निवासी ऋषिकेश सराफ ने जनहित याचिका दायर की। अधिवक्ता परितोष गुप्ता ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए तर्क दिया कि याचिकाकर्ता ने जबलपुर शहर में आयुर्वेद, होम्योपैथी व अन्य पद्धतियों से प्रशिक्षित 28 चिकित्सकों द्वारा एलोपैथी से इलाज करने की शिकायत की थी। लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने इनमें से 13 की जांच की और सिर्फ पांच के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध किया। जबकि किसी भी झोलाछाप डॉक्टर के क्लीनिक को सील नहीं किया गया। तर्क दिया गया कि कोरोना महामारी संक्रमण काल में भी ये झोलाछाप डॉक्टर बिना एलोपैथिक डिग्री के सर्दी खांसी बुखार जुकाम आदि लक्षणों वाले मरीजों का एलोपैथिक दवाओं के जरिए इलाज कर रहे हैं। होम्योपैथी आयुर्वेदिक आदि अन्य पद्धतियों से प्रशिक्षित डाक्टरों को क्लीनिक खोलने के पहले अपना पंजीयन कराना होता है। लेकिन पंजीयन की शर्त होती है कि वे जिस पद्धति में प्रशिक्षित है, उसी पद्धति से मरीज का इलाज करेंगे। जबकि ऐसा नहीं हो रहा है और शहर के अधिकांश ऐसे डॉ जो एलोपैथी से प्रशिक्षित नहीं है, क्लीनिक खोलकर एलोपैथी से इलाज कर रहे हैं। पूर्व में स्वास्थ्य विभाग ने जबलपुर पुलिस महानिरीक्षक को रिपोर्ट दी थी। इस पर महानिरीक्षक ने जबलपुर एसपी को निर्देश दिया था कि वे संबंधित झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई करें । लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कमिश्नर और कलेक्टर ने भी झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए। लेकिन कुछ के खिलाफ ही एफ आई आर दर्ज की गई।

मरीजों का गैर कानूनी तरीके से इलाज कर रहे: आलम यह है कि अभी भी शहर में झोलाछाप डॉक्टर धड़ल्ले से मरीजों का गैर कानूनी तरीके से इलाज कर रहे हैं। आग्रह किया गया कि झोलाछाप डॉक्टरों की क्लीनिक बंद कराई जाएं। उनके प्रैक्टिस करने पर रोक लगाई जाए। राज्य सरकार की ओर से घमापुर स्थित क्लिनिक चलाने वाले जितेंद्र वर्मा व अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की जानकारी दी गई। सुनवाई के बाद कोर्ट ने सरकार को स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। सरकार का पक्ष उपमहाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने रखा।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम