पेट्रोल-डीजल पर IOCL की चेतावनी: ‘यह तो लागत का सिर्फ 10% है’, क्या ₹120 के पार जाएगा तेल?। 15 मई से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद जनता को उम्मीद थी कि अब कीमतें स्थिर होंगी, लेकिन इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) के निदेशक के बयान ने नई चिंता पैदा कर दी है। IOCL निदेशक अरविंद कुमार ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा बढ़ोतरी अंतरराष्ट्रीय कीमतों के दबाव को देखते हुए बहुत कम है।
पेट्रोल-डीजल पर IOCL की चेतावनी: ‘यह तो लागत का सिर्फ 10% है’, क्या ₹120 के पार जाएगा तेल?
₹3 की वृद्धि तो ऊंट के मुंह में जीरा
IOCL के निदेशक अरविंद कुमार ने कहा कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में जो उछाल आया है, उसकी तुलना में ₹3 का इजाफा “बेहद मामूली” है। उनके अनुसार:
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लागत की भरपाई नहीं: अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी हुई लागत की पूरी भरपाई करने के लिए जितने बड़े इजाफे की जरूरत थी, यह ₹3 की वृद्धि उसका सिर्फ 10 प्रतिशत हिस्सा है।
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90% बोझ अब भी कंपनियों पर: कंपनियों का दावा है कि वे अभी भी बड़े घाटे (Under-recoveries) का बोझ उठा रही हैं।
100% क्षमता पर काम कर रही हैं रिफाइनरियां
निदेशक ने जानकारी दी कि देश में ईंधन की सप्लाई को निर्बाध (Seamless) बनाए रखने के लिए सभी ऑयल रिफाइनरियां अपनी 100% से अधिक क्षमता पर काम कर रही हैं। सप्लाई चेन पर दबाव और परिचालन लागत (Operating Cost) में वृद्धि के कारण कीमतें बढ़ाना कंपनियों की मजबूरी बन गई है।
क्या पेट्रोल-डीजल और महंगा होगा?
ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के रुख से साफ है कि आने वाले हफ्तों में ईंधन की कीमतों में किस्तों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। कंपनियों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम स्थिर नहीं होते, तब तक आम उपभोक्ताओं को राहत मिलने के आसार कम हैं।
निष्कर्ष और असर
अगर तेल कंपनियां लागत की पूरी भरपाई करने के लिए बाकी 90% हिस्से का बोझ भी जनता पर डालती हैं, तो पेट्रोल और डीजल की कीमतें एक नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच सकती हैं। इससे मालभाड़ा बढ़ेगा, जिसका सीधा असर रसोई के बजट और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ना तय है।

