होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान-यूएस टैक्स योजना से बढ़ी अंतरराष्ट्रीय चिंता, ईरान और अमेरिका द्वारा हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर लेवी (टैक्स) लगाने की योजना ने दुनिया भर में चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग को स्थायी टोल बूथ में बदलने जैसा होगा, जो UNCLOS (United Nations Convention on the Law of the Sea) के तहत सभी देशों के जहाजों के ट्रांजिट अधिकार का उल्लंघन माना जा सकता है।होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान-यूएस टैक्स योजना से बढ़ी अंतरराष्ट्रीय चिंता
होर्मुज स्ट्रेट ओमान और ईरान के समुद्री क्षेत्र में आती है, लेकिन यह अंतरराष्ट्रीय स्ट्रेट होने के कारण सभी देशों के जहाजों को बिना रोक-टोक गुजरने का अधिकार प्राप्त है। यदि इस पर टैक्स लगाया गया तो यह अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रत्यक्ष उल्लंघन के रूप में देखा जाएगा और अन्य महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर भी मिसाल बन सकती है, जैसे मलक्का स्ट्रेट, बाब-अल-मंदेब और बोस्पोरस स्ट्रेट।
इसके अलावा भारत के आयात-निर्यात पर इसका सीधा असर पड़ेगा। ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने और वैकल्पिक मार्ग विकसित करने के लिए भारत को चाबहार बंदरगाह और INSTC जैसे रास्तों पर काम तेज करना होगा। बढ़ते खतरे को देखते हुए भारतीय नौसेना की भूमिका भी अधिक सक्रिय हो सकती है।
विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि होर्मुज पर टैक्स लगाने की इस पहल से अंतरराष्ट्रीय व्यापार महंगा और अस्थिर हो सकता है, और दुनिया में ‘टैक्स वॉर’ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।

