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Inflation Alert: डीजल की महंगाई से कांपेगा ट्रांसपोर्ट सेक्टर! हर ₹5 की बढ़ोतरी पर 2.8% तक महंगा होगा मालभाड़ा; आम जनता पर बढ़ेगा बोझ

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Inflation Alert: डीजल की महंगाई से कांपेगा ट्रांसपोर्ट सेक्टर! हर ₹5 की बढ़ोतरी पर 2.8% तक महंगा होगा मालभाड़ा; आम जनता पर बढ़ेगा बोझ। पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल $100 प्रति बैरल के पार बना हुआ है। हालांकि भारत में तेल कंपनियों ने फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रखी हैं, लेकिन ट्रांसपोर्ट सेक्टर को डर है कि यह राहत लंबे समय तक नहीं टिकेगी। ट्रांसपोर्टर्स ने चेतावनी दी है कि यदि ईंधन महंगा हुआ, तो वे मालभाड़ा बढ़ाने को मजबूर होंगे, जिससे देश में महंगाई का एक नया दौर शुरू हो सकता है।

Inflation Alert: डीजल की महंगाई से कांपेगा ट्रांसपोर्ट सेक्टर! हर ₹5 की बढ़ोतरी पर 2.8% तक महंगा होगा मालभाड़ा; आम जनता पर बढ़ेगा बोझ

मालभाड़े पर कितना पड़ेगा असर?

क्रिसिल (CRISIL) इंटेलिजेंस की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, डीजल की कीमतों में होने वाली मामूली बढ़ोतरी भी ट्रांसपोर्टर्स के गणित को बिगाड़ देती है:डीजल की कीमत में हर 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी होने पर ट्रांसपोर्टर्स को अपना मुनाफा बचाने के लिए मालभाड़े (Freight Rates) में 2.5% से 2.8% तक का इजाफा करना होगा। एक ट्रक ऑपरेटर के कुल खर्च का 50% से 60% हिस्सा अकेले डीजल पर खर्च होता है। ऐसे में ईंधन महंगा होते ही उनकी कमाई सीधे प्रभावित होती है।

तेल कंपनियों को रोजाना 1,000 करोड़ का नुकसान

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, वैश्विक बाजार में तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद देश में दाम न बढ़ाने के कारण सरकारी तेल कंपनियां (IOC, BPCL, HPCL) भारी संकट में हैं।तेल कंपनियों को हर दिन करीब 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। इस तिमाही में कंपनियों की कुल अंडर-रिकवरी लगभग 1.98 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यह दबाव संकेत दे रहा है कि आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है।

छोटे ट्रांसपोर्टर्स पर ‘दोहरी मार’

मार्केट में ट्रकों की संख्या अधिक है लेकिन माल ढुलाई की मांग फिलहाल कमजोर है। ऐसे में छोटे ऑपरेटर्स के लिए लागत निकालना मुश्किल हो रहा है।  कई ऑपरेटर्स डीजल की बढ़ी हुई लागत का 80% हिस्सा भी ग्राहकों से वसूल नहीं पा रहे हैं, जिससे उनका मुनाफा खत्म हो रहा है। टायर, टोल टैक्स, मेंटेनेंस और ड्राइवरों की बढ़ती सैलरी ने पहले ही बोझ बढ़ा रखा है।

महंगाई पर दिखेगा असर

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रांसपोर्ट सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन है। यदि लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ती है, तो दूध, सब्जी, फल और रोजमर्रा के एफएमसीजी (FMCG) उत्पादों की कीमतें बढ़ना तय है। क्रिसिल का पैन-इंडिया फ्रेट इंडेक्स मार्च के 101.4 से गिरकर अप्रैल में 100.5 पर आ गया है, जो माल ढुलाई की रफ्तार धीमी होने का संकेत है।

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