ADC-S सिस्टम कैसे काम करता है:
ट्रांसपोर्ट विमान ऊँचाई से विशेष कैनिस्टर गिराएंगे। प्रत्येक कैनिस्टर में 6-8 स्मार्ट ड्रोन होंगे। जैसे ही कैनिस्टर खुलेगा, ड्रोन अपने लक्ष्य की पहचान कर हमला करेंगे। ड्रोन 500 किमी तक दूरी तय कर सकते हैं, 350-400 किमी/घंटा की रफ्तार से उड़ेंगे।प्रत्येक ड्रोन कम से कम 30 किलो हथियार ले जा सकेगा और लक्ष्य पर 5 मीटर की सटीकता से वार करेगा।
GPS बंद होने पर भी ड्रोन लक्ष्य हिट कर सकते हैं।
क्यों है यह गेम-चेंजर:
अब महंगे क्रूज मिसाइल या फाइटर जेट की जरूरत नहीं।ट्रांसपोर्ट विमान सुरक्षित रहते हुए सटीक स्ट्राइक कर सकेंगे। दर्जनों ड्रोन एक साथ हमला कर दुश्मन की एयर डिफेंस को भ्रमित करेंगे (स्वार्म अटैक)।
आत्मनिर्भर भारत:
प्रोजेक्ट Make-II कैटेगरी में है, जिसमें कम से कम 50% स्वदेशी तकनीक जरूरी है।* इससे भारतीय रक्षा कंपनियों और स्टार्टअप्स को अवसर मिलेगा।
आगे की योजना:
कंपनियों के आवेदन की अंतिम तिथि:30 अप्रैल 2026। सफल सिस्टम को Buy Indian-IDDM कैटेगरी में खरीदा जाएगा।ADC-S प्रणाली के लागू होने के बाद, भारतीय वायुसेना की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी और दुश्मन पर तेज, सटीक और सुरक्षित हमले संभव होंगे।यह कदम भविष्य के नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर की दिशा में भारतीय वायुसेना के लिए बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।

