नई दिल्ली। इनकम-टैक्स एक्ट 2026: डिजिटल कंपनियों से लेकर ESOP तक, 1 अप्रैल से 10 बदलाव जानना जरूरी। 1 अप्रैल, 2026 से इनकम-टैक्स नियमों में बड़े बदलाव होने जा रहे हैं, जो सीधे आपके बजट और निवेश पर असर डाल सकते हैं। नए नियम डिजिटल इकोनॉमी, कर्मचारियों के भत्ते और शेयर वैल्यूएशन से जुड़े कई अहम पहलुओं को कवर करते हैं।
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इनकम-टैक्स एक्ट 2026: डिजिटल कंपनियों से लेकर ESOP तक, 1 अप्रैल से 10 बदलाव जानना जरूरी
1. डिजिटल कंपनियों पर भारत में टैक्स
अब विदेश स्थित कंपनियों को भी भारत में टैक्स देना होगा अगर उनके भारत में 3 लाख यूज़र्स हैं या ₹2 करोड़ से ज्यादा का भुगतान भारत से आता है। इसका मतलब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स भारत में बिना ऑफिस के भी टैक्स के दायरे में आएंगे।
2. टैक्स अधिकारी को बढ़े अधिकार
अगर किसी नॉन-रेज़िडेंट की आय स्पष्ट नहीं है, तो टैक्स अधिकारी तय प्रतिशत या कोई दूसरा तरीका इस्तेमाल करके आय तय कर सकते हैं। इससे विवादों की संभावना बढ़ सकती है।
3. शेयर बाजार ट्रांजैक्शन पर नजर
शेयरों की खरीद-बिक्री का पूरा रिकॉर्ड सात साल तक रखना अनिवार्य होगा। लेन-देन में बदलाव की जानकारी भी नियमित दी जाएगी।
4. विदेशी सौदों का फॉर्मूला तय
भारत से जुड़े विदेशी शेयर ट्रांसफर की आय पर टैक्स लगाने का स्पष्ट फॉर्मूला निर्धारित किया गया है।
5. शेयरों का वैल्यूएशन
लिस्टेड शेयर: बाजार कीमत पर
अनलिस्टेड शेयर: मर्चेंट बैंकर द्वारा वैल्यूएशन
6. टेक-होम सैलरी पर असर
मकान किराया अब शहर की आबादी पर आधारित होगा
फ्री मील केवल ₹200 प्रति भोजन टैक्स फ्री
₹15,000 से ज्यादा के गिफ्ट टैक्सेबल
7. कर्मचारी लोन पर टैक्स
रियायती या ब्याज-मुक्त लोन की गणना अब भारतीय स्टेट बैंक की लोन रेट के आधार पर होगी।
8. ESOP नियम साफ
लिस्टेड: बाजार मूल्य
अनलिस्टेड: मर्चेंट बैंकर द्वारा वैल्यूएशन
9. खर्चों की अस्वीकृति
प्रत्यक्ष खर्च और औसत निवेश मूल्य का 1% शामिल।
10. जीरो कूपन बॉन्ड
मैच्योरिटी 10–20 साल
निवेश योग्य रेटिंग
फंड्स उपयोग का समय सीमा सख्ती से पालनए नए नियम डेटा-बेस्ड और व्यवस्थित टैक्सेशन की ओर सरकार की कोशिश को दर्शाते हैं। टैक्सपेयर को अपने बजट और निवेश में बदलाव करने की जरूरत पड़ेगी।
