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कजरी तीज पर कुंवारी लड़कियों को कैसे मिलेगी मनचाहे वर की प्राप्ति? जानें व्रत के नियम, शुभ मुहूर्त और अर्घ्य की विधि
अविवाहित कन्याएं भी रख सकती हैं कजरी तीज का व्रत

कजरी तीज पर कुंवारी लड़कियों को कैसे मिलेगी मनचाहे वर की प्राप्ति? जानें व्रत के नियम, शुभ मुहूर्त और अर्घ्य की विधि
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला कजरी तीज (सातूड़ी तीज) का पर्व भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। आमतौर पर सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य के लिए यह व्रत रखती हैं, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अविवाहित कन्याएं भी मनचाहे व सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए कजरी तीज का व्रत रख सकती हैं।
कजरी तीज 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
- तृतीया तिथि प्रारंभ: 30 अगस्त 2026 (सुबह 09:36 बजे से)
- तृतीया तिथि समाप्त: 31 अगस्त 2026 (सुबह 08:50 बजे तक)
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:51 से 05:37 बजे तक
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:14 से 01:04 बजे तक
- संध्या पूजा मुहूर्त: शाम 06:54 से रात 08:03 बजे तक
अविवाहित कन्याओं के लिए महत्वपूर्ण नियम
- निर्जला व्रत जरूरी नहीं: सुहागिनों की तरह कुंवारी लड़कियों के लिए निर्जला व्रत रखना अनिवार्य नहीं है। वे अपनी क्षमता और स्वास्थ्य अनुसार फलाहार करके या फलाहारी व्रत रख सकती हैं।
- संकल्प व पूजन: सुबह स्नान के बाद साफ वस्त्र पहनकर भगवान शिव और माता पार्वती के समक्ष योग्य जीवनसाथी की कामना का संकल्प लें।
- शिव-पार्वती आराधना: माता पार्वती को फूल व फल चढ़ाएं और भगवान शिव को जल व बेलपत्र अर्पित करें।
- मंत्र का जाप: दिनभर ‘ॐ गौरीशंकराय नमः’ मंत्र का जाप करें और कजरी तीज की कथा सुनें।
- नीमड़ी माता की पूजा: कई स्थानों पर शाम के समय नीम की टहनी (नीमड़ी माता) की पूजा की परंपरा है।
- चंद्र अर्घ्य व सत्तू पारण: रात में चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य दें और सत्तू खाकर व्रत का पारण करें।








