Hospital Grading: अब अस्पतालों की होगी रेटिंग, नीति आयोग ला रहा है नेशनल क्वालिटी फ्रेमवर्क

Hospital Grading: अब अस्पतालों की होगी रेटिंग, नीति आयोग ला रहा है नेशनल क्वालिटी फ्रेमवर्क
नई दिल्ली: जब भी घर में कोई बीमार पड़ता है, सबसे बड़ी चिंता सही और सुरक्षित अस्पताल चुनने की होती है। अक्सर मरीजों और उनके परिजनों को यह जानकारी नहीं होती कि कौन सा अस्पताल वास्तव में सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण इलाज दे रहा है।
अब आम जनता की इसी उलझन को दूर करने के लिए केंद्र सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। नीति आयोग (NITI Aayog) एक ऐसे नेशनल क्वालिटी फ्रेमवर्क (National Quality Framework) पर काम कर रहा है, जिसके तहत देश के सभी सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों की स्टार ग्रेडिंग (Grading) की जाएगी।
क्या है नीति आयोग का नया प्लान?
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अंतरराष्ट्रीय मानक: अस्पतालों की यह ग्रेडिंग पूरी तरह से वैश्विक मानकों (International Standards) पर आधारित होगी।
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पारदर्शिता (Transparency): अभी तक एनएबीएच (NABH) जैसे मानकों की रिपोर्ट्स सार्वजनिक नहीं होती थीं, लेकिन नई व्यवस्था में अस्पतालों की ग्रेडिंग रिपोर्ट को पब्लिक डोमेन (Public Domain) में रखा जाएगा।
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कब से लागू होगा: यह फ्रेमवर्क इस साल (2026) के अंत तक तैयार हो जाएगा, जिसके बाद अगले वित्त वर्ष (FY 2027-28) से अस्पतालों की ग्रेडिंग प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।
किन कड़े पैमानों पर कसे जाएंगे अस्पताल?
नीति आयोग के सदस्य एम. श्रीनिवास की अगुवाई में हुई उच्चस्तरीय बैठक में अस्पतालों की रैंकिंग तय करने के लिए निम्नलिखित मुख्य मानकों पर सहमति बनी है:
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मरीज की सुरक्षा और अनुभव: इलाज के दौरान सुरक्षा, दवाओं के वितरण में गलतियां और डिस्चार्ज के बाद मरीज का फीडबैक।
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री-एडमिशन रेट (Readmission Rate): इलाज के बाद मरीज को कितनी बार दोबारा भर्ती होना पड़ा।
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गंभीर बीमारियों के नतीजे: कैंसर (ऑन्कोलॉजी) सर्जरी के बाद मृत्यु दर और ऑर्गन ट्रांसप्लांट के बाद मरीज के बचने की दर (Survival Rate)।
ब्रिटेन के ‘NHS’ मॉडल से ली गई प्रेरणा
भारत का यह नया सिस्टम ब्रिटेन (UK) के नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) से प्रेरित है। यूके में अस्पतालों के ‘क्वालिटी इंडिकेटर्स’ की रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से पब्लिश की जाती है, जिससे मरीजों को सही फैसला लेने में मदद मिलती है।
इस कदम से किसको क्या फायदा होगा?
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मरीजों को: सही, पारदर्शी और सुरक्षित अस्पताल का चुनाव करने में आसानी होगी।
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अस्पतालों को: बेहतर सुविधाएं देने वाले अस्पताल भीड़ से अलग पहचान बना सकेंगे, जबकि खराब प्रदर्शन करने वाले अस्पताल सुधार के लिए मजबूर होंगे।
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मेडिकल टूरिज्म: विदेश से भारत इलाज कराने आने वाले विदेशी मरीजों का भरोसा बढ़ेगा, जिससे मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा।
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हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां: इंश्योरेंस कंपनियां अस्पतालों की ग्रेडिंग के आधार पर अपने नए हेल्थ प्लान और प्रीमियम की दरें तय कर सकेंगी।








