जबलपुर। Promotion एमपी की नई प्रमोशन नीति पर हाई कोर्ट सख्त, ‘मेरिट पर प्रमोशन’ के प्रावधान पर फंसा पेंच, HC ने राज्य सरकार से मांगी संवैधानिक स्पष्टता
हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ के समक्ष मंगलवार को प्रमोशन में आरक्षण को लेकर सरकार की नई नीति को चुनौती के मामले में सुनवाई हुई। इस दौरान अजाक्स और सपाक्स की ओर से दलीलें पूरी की गईं। सपाक्स ने हाई कोर्ट के सामने कर्मचारियों के ग्रेडेशन के आंकड़े भी रखे गए।
इस दौरान हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा कि नई प्रमोशन में आरक्षण नीति में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का कहां पर पालन किया गया है। कोर्ट ने यह भी पूछा कि आरबी राय मामले में बताई गई कमियों को पूरा करने के लिए सरकार ने क्या किया है। हाई कोर्ट ने पूछा कि पुरानी पॉलिसी में किन सुधारों के बाद नई पालिसी लाई गई है। कोर्ट ने राज्य सरकार को जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई तीन फरवरी को नियत की गई है।
एससी-एसटी वर्ग के लिए मेरिट पर प्रमोशन से संबंधित कोई भी प्रावधान नियमों में मौजूद नहीं है। भारत का संविधान एवं सुप्रीम कोर्ट के इंदिरा साहनी के जजमेंट सहित कई फैसले हैं जो स्पष्ट प्रावधान करते हैं कि सर्वप्रथम अनारक्षित वर्ग में प्रमोशन होंगे। तत्पश्चात आरक्षित वर्ग के एवं जो कर्मचारी मेरिट के आधार पर अनारक्षित में चयनित होंगे उनकी गणना आरक्षित वर्ग में किए जाने का उक्त नियमों में प्रावधान है।

