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Haldwani Violence: पुलिसवालों को जिंदा जलाने आई थी भीड़… नैनीताल की DM ने बताई हल्द्वानी कांड की पूरी कहानी

Haldwani Violence: पुलिसवालों को जिंदा जलाने आई थी भीड़... नैनीताल की DM ने बताई हल्द्वानी कांड की पूरी कहानी

Nainital DM Vandana Singh On Haldwani Violence: उत्तराखंड के हल्द्वानी में कल शाम जो कुछ हुआ, उसकी पूरी तैयारी की गई थी. कुछ दिन पहले ही आसपास के घरों की छतों पर पत्थर रखे गए थे. थाने को भी फूंकने की कोशिश हुई. पुलिसवालों को भीड़ जिंदा जलाने आई थी. नैनीताल की जिलाधिकारी वंदना सिंह ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर शहर का सुकून भंग करने वाले बनभूलपुरा के उपद्रवियों की पूरा कच्चा चिट्ठा सामने रखा.

उन्होंने बताया कि कल अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू होते ही भीड़ इकट्ठा होनी शुरू हो गई. थाने पर पेट्रोल बम फेंके गए. थाने के बाहर गाड़ियों को जलाया गया. वहां मौजूद पुलिस अधिकारियों पर हमला किया गया जबकि तब तक फोर्स बिल्कुल शांत थी. नैनीताल की जिलाधिकारी ने आज बताया कि उपद्रवियों की पहले से तैयारी थी. अकारण पुलिस टीम पर हमला किया गया. थाने में मौजूद पुलिसवालों को जिंदा जलाने की कोशिश की गई. डीएम ने वीडियो दिखाकर बताया कि कुछ समय पहले उस इलाके के घरों की छतें खाली थीं. हालांकि कल आगजनी शुरू होने के बाद जब ड्रोन से इलाके की तस्वीरें ली गईं तो छतें खाली नहीं दिखीं.

कोई एक संपत्ति पर टारगेट नहीं

डीएम ने बताया कि 15-20 दिन से हल्द्वानी के अलग-अलग क्षेत्रों में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई चल रही है. सरकारी संपत्तियों से अवैध कब्जे हटाए जा रहे हैं. सरकारी संपत्तियों को सुरक्षित किया जा रहा है. सभी को नोटिस दिए गए. सुनवाई के मौके दिए गए. कुछ लोग उच्च न्यायालय गए. जब उन्हें समय नहीं मिला तब वहां विभागों ने ध्वस्तीकरण अभियान चलाया. यह कोई एक इलाके या एक सरकारी संपत्ति को अवैध कब्जे से मुक्त कराने के लिए की गई कार्रवाई नहीं थी.

अब उस जगह के बारे में जान लीजिए

डीएम वंदना सिंह ने बताया कि यह खाली प्रॉपर्टी है, इसमें दो स्ट्रक्चर हैं. ये न तो कहीं धार्मिक संरचना के रूप में रजिस्टर हैं और न ही किसी प्रकार से मान्यता प्राप्त हैं. उस स्ट्रक्चर को कुछ लोग मदरसा कहते हैं कुछ लोग नमाज स्थल कहते हैं. हालांकि उसका कानूनी दस्तावेज में कोई अस्तित्व नहीं है. खुले स्पेस का कब्जा ले लिया गया था और एक नोटिस स्ट्रक्चर पर चस्पा किया गया.

यह इलाका कथित रूप से मलिक का बगीचा नाम से जाना जाता है जबकि कागजों में यह नाम कहीं नहीं है. नोटिस में खुद से तीन दिन के अंदर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए. 30 तारीख को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि कागज दिखाएं या हटाएं अन्यथा नगर निगम द्वारा हटा दिया जाएगा. 4 तारीख की तिथि निर्धारित थी. 3 तारीख को आसपास के लोग नगर निगम आए और काफी चर्चा की. उन लोगों ने हाई कोर्ट जाने का अवसर देने की मांग की. कहा गया कि कोर्ट का जो भी निर्णय होगा, हमें स्वीकार होगा. हमने समय नहीं दिया क्योंकि यह पहले ही दिया जा चुका था.

उसी दिन शाम को संबंधित पक्ष एक कागज ले आया. डीएम ने कहा कि हमने कोर्ट के 2007 के आदेश को समझने के लिए समय लिया और उस दिन ध्वस्तीकरण की कार्यवाही रोक दी गई. हमने किसी भी प्रकार की जल्दबाजी नहीं की. स्ट्रक्चर को सील किया गया. पीएसी वहां तैनात थी. कोई बेघर नहीं हो रहा था, वहां कोई नहीं रह रहा था.

इस बीच हाई कोर्ट में मामला पहुंच गया. दो दिन सुनवाई चली और कोर्ट ने संबंधित पक्ष को राहत देने से मना कर दिया. इसके बाद कल शांतिपूर्वक कार्रवाई शुरू हुई. अतिक्रमण के लिए जरूरी फोर्स लगाई गई लेकिन कुछ अराजक तत्वों ने आधे घंटे के भीतर नगर निगम टीमों पर पत्थर बरसाने शुरू किए गए.

पहले पत्थर आया फिर पेट्रोल बम

डीएम ने आज साफ कहा कि 30 जनवरी को छतों पर पत्थर नहीं था. कोर्ट की सुनवाई के समय छतों पर पत्थर जुटाए गए जिससे जब भी कार्रवाई हो तो अटैक किया जा सके. इस तरह से स्टेट मशीनरी को रोकने की साजिश की गई. हालांकि कल ऑफिसर्स ने अपनी कार्रवाई जारी रखी. डीएम ने बताया कि पहले पत्थर लेकर भीड़ आई थी, उन्हें तितर- बितर किया गया तो भीड़ पेट्रोल बम लेकर आई. आग लगाकर उन्होंने फेंकना शुरू किया. तब तक पुलिस किसी तरह से बल प्रयोग नहीं कर रही थी.

गोली चलाने का आदेश क्यों?

जिलाधिकारी ने बताया कि थाने पर हमला हुआ तब बल प्रयोग करने के आदेश दिए गए. कर्फ्यू लगाया गया. हमारी टीमों की सुरक्षा को देखते हुए स्थानीय मजिस्ट्रेट ने कमर के नीचे फायर करने के आदेश दिए. फोर्स का ज्यादा इस्तेमाल थाने की सुरक्षा के लिए किया गया. नैनीताल की डीएम वंदना सिंह ने आज मीडिया को वो सारे वीडियो और तस्वीरें दिखाईं जिसमें हल्द्वानी हिंसा की पूरी साजिश समझ में आती है.

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