ग्वालियर शीतला माता मंदिर हादसा: मुरैना में एक साथ उठीं चाचा और मासूम जुड़वा भतीजों की अर्थियां
ग्वालियर/मुरैना: ग्वालियर के आंतरी स्थित सांतऊ गांव का प्राचीन शीतला माता मंदिर उस खौफनाक हादसे के बाद अब धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर लौट रहा है। हालांकि, शनिवार-रविवार की दरमियानी रात हुए दर्दनाक हादसे का खौफ भक्तों के दिलों में अभी भी ताजा है, लेकिन श्रद्धालुओं का माता शीतला के प्रति अटूट विश्वास कम नहीं हुआ है। अष्टमी और नवमी के पावन अवसर पर मध्य प्रदेश के अलावा राजस्थान और उत्तर प्रदेश से भी श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं, हालांकि आम दिनों की तुलना में भीड़ थोड़ी कम देखी जा रही है।
गौरतलब है कि शनिवार-रविवार की रात नो-एंट्री तोड़कर घुसे एक ओवरलोड ट्रक ने मंदिर परिसर में सो रहे व मौजूद श्रद्धालुओं को कुचल दिया था, जिसमें बच्चों सहित 15 लोगों की मौत हो गई थी और 42 लोग घायल हो गए थे।
12 साल की तपस्या और मन्नतों के बाद जन्मे थे जुड़वा बेटे
इस भीषण त्रासदी ने कई हंसते-खेलते परिवारों की खुशियां छीन ली हैं। इनमें सबसे दुखद कहानी ग्वालियर के गदाईपुरा में रहने वाले त्यागी परिवार की है:
12 साल बाद गूंजी थी किलकारी: मुरैना के जौरा (हार गांगोली गांव) के रहने वाले 55 वर्षीय विद्याराम त्यागी ने 12 वर्षों तक कठिन तपस्या और मंदिरों के चक्कर काटने के बाद दो जुड़वा बेटों—अमन और लव को पाया था।
मन्नत मांगने गए थे मंदिर: शनिवार रात दोनों मासूम बच्चे अपने चाचा अशोक त्यागी के साथ शीतला माता मंदिर में दर्शन और मन्नत मांगने गए थे।
एक पल में उजड़ गई दुनिया: बेकाबू ट्रक की चपेट में आने से चाचा अशोक और दोनों मासूम जुड़वा भतीजों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जिससे परिवार का चिराग हमेशा के लिए बुझ गया।
गांव में एक साथ उठीं तीन अर्थियां, पसरा मातम
रविवार देर शाम जब मुरैना के पैतृक गांव में चाचा और दोनों मासूम बच्चों की अर्थियां एक साथ उठीं, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं और पूरे गांव में चीख-पुकार मच गई।
इस हादसे का दर्द पूरे अंचल में देखा गया। ग्वालियर के थाटीपुर स्थित दो श्मशान घाटों पर एक साथ कई मृतकों का अंतिम संस्कार किया गया। इसके अलावा शिवपुरी, श्योपुर और बड़ागांव में भी गमगीन माहौल के बीच इस हादसे के शिकार हुए अन्य मृतकों को अंतिम विदाई दी गई।











