सेटेलाइट से रखी जाएगी अवैध रेत खनन पर नजर, सरकार ने नई पहल की है। भारत सरकार ने पूरे देश भर में अवैध रेत उत्खनन का पता लगाने और उसे रोकने के लिए Mining Monitoring System विकसित कर लिया गया है। अब भारत की सभी नदियों की सेटेलाइट से निगरानी की जाएगी। यदि कहीं कोई रात के अंधेरे में भी रेत का उत्खनन कर रहा है तो सिर्फ 8 मिनट के भीतर इसकी जानकारी संबंधित जिले के जिलाधिकारी, डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट, कलेक्टर तक पहुंचा दी जाएगी। यह जानकारी आज राज्यसभा में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री श्री कीर्ति वर्धन सिंह ने एक लिखित उत्तर में दी।
भारत में रेत उत्खनन से संबंधित कानून
खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 (एमएमडीआर अधिनियम 1957) की धारा 3(ई) के तहत रेत को एक लघु खनिज के रूप में परिभाषित किया गया है। रेत खनन को खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 [एमएमडीआर अधिनियम] और इस अधिनियम की धारा 15 के तहत संबंधित राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) प्रशासनों द्वारा तैयार किए गए खनिज रियायत नियमों के अनुसार विनियमित किया जाता है। इसके अलावा, खान एवं खनिज अधिनियम की धारा 23सी, राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों को खनिजों के अवैध खनन, परिवहन और भंडारण को रोकने और उससे जुड़े उद्देश्यों के लिए नियम बनाने और रेत खनन दिशा-निर्देशों से संबंधित विभिन्न प्रावधानों को लागू करने का अधिकार देती है।
Appropriate regulatory regime will be in place
space technology can be used
हवाई सर्वेक्षण और रिमोट सेंसिंग तथा भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) अनुप्रयोगों आदि के उपयोग का प्रावधान “सतत रेत खनन प्रबंधन दिशा-निर्देश 2016” तथा “रेत खनन के लिए प्रवर्तन और निगरानी दिशा-निर्देश” 2020 में निर्धारित किया गया है। इसके अलावा, खान मंत्रालय ने भारतीय खान ब्यूरो के माध्यम से, भास्कराचार्य अंतरिक्ष अनुप्रयोग और भू-सूचना विज्ञान संस्थान (बीआईएसएजी), गांधीनगर तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के साथ समन्वय में खनन निगरानी प्रणाली (एमएसएस) विकसित की है। इससे देश में अवैध खनन गतिविधि पर अंकुश लगाने के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जा सकेगा।

