सरकारी ज़मीन गायब, पास में बहुमंजिला निर्माण: क्या बच पाएगी जबलपुर की ‘बैलेंसिंग रॉक’?

सरकारी ज़मीन गायब, पास में बहुमंजिला निर्माण: क्या बच पाएगी जबलपुर की 'बैलेंसिंग रॉक'?

सरकारी ज़मीन गायब, पास में बहुमंजिला निर्माण: क्या बच पाएगी जबलपुर की ‘बैलेंसिंग रॉक’?

जबलपुर: भूकंप के भयंकर झटके सहने के बावजूद अपने स्थान पर अडिग खड़ी जबलपुर की प्रसिद्ध प्राकृतिक धरोहर ‘बैलेंसिंग रॉक’ के अस्तित्व पर अब संकट के बादल मंडराने लगे हैं। मदन महल की पहाड़ियों पर स्थित इस ऐतिहासिक और प्राकृतिक अजूबे से महज 20 फीट की दूरी पर बहुमंजिला इमारत का निर्माण कार्य चल रहा है, जिससे इसकी सुरक्षा को लेकर स्थानीय नागरिकों और विशेषज्ञों में भारी चिंता है।

क्या हैं मुख्य विवाद और आरोप?

  • सरकारी जमीन में फर्जीवाड़े का आरोप: सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. पीजी नाजपांडे का दावा है कि 1910 के राजस्व रिकॉर्ड में खसरा नंबर 194 की लगभग 30 एकड़ जमीन सरकारी दर्ज थी। हालांकि, अब महज 0.8 हेक्टेयर सरकारी जमीन ही बची है। उन्होंने जमीन के स्वामित्व, सीमांकन और नामांतरण दस्तावेजों की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

  • भूकंप झेल चुकी चट्टान को कंपन से खतरा: यह विशाल चट्टान 1935 के भूकंप और 1997 में आए 6.5 की तीव्रता के भीषण भूकंप के बावजूद टिकी रही। पुरातत्व विशेषज्ञ मनोहर सिंह उईके के अनुसार, निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाली भारी मशीनों के कंपन और जल निकासी की समस्या से चट्टान की नीव/जमीन को नुकसान पहुंच सकता है।

  • अराजकता और शराबखोरी का अड्डा: परिसर में शाम ढलते ही शराबखोरी होने और डिस्पोजल व कचरा बिखरे रहने की शिकायतें हैं। उचित लाइटिंग और सुरक्षा व्यवस्था न होने से स्थल की अनदेखी साफ उजागर हो रही है।

विभागों की लापरवाही: जिम्मेदारी लेने से पल्ला झाड़ते अधिकारी

जब इस संबंध में जिम्मेदार विभागों से बात की गई, तो सबने एक-दूसरे पर पल्ला झाड़ लिया,पर्यटन विभाग का कहना है कि इसके संरक्षण की जिम्मेदारी पुरातत्व विभाग की है। सीनियर गाइड राजकुमार ने स्पष्ट किया कि बैलेंसिंग रॉक उनके अधीन नहीं आता और इसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की है।नगर निगम के भवन अधिकारी शैलेंद्र सिंह कौरव ने कहा कि उन्हें पास में हो रहे निर्माण की जानकारी नहीं है। शिकायत मिलने पर जांच और अवैध पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।

संरक्षण के लिए उठती मांगें

जबलपुर की पहचान बनी इस प्राकृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने के लिए तत्काल भूवैज्ञानिक व तकनीकी जांच, राजस्व रिकॉर्ड्स की पड़ताल, परिसर की नियमित सफाई, लाइटिंग और सुरक्षा बल की तैनाती की मांग उठ रही है।