ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स: अंतिम थ्रो में दिखा ‘नीरज चोपड़ा मैजिक’- यशवीर सिंह ने 85.41 मीटर भाला फेंककर जीता ब्रॉन्ज मेडल

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स: अंतिम थ्रो में दिखा 'नीरज चोपड़ा मैजिक'- यशवीर सिंह ने 85.41 मीटर भाला फेंककर जीता ब्रॉन्ज मेडल

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स: अंतिम थ्रो में दिखा ‘नीरज चोपड़ा मैजिक’- यशवीर सिंह ने 85.41 मीटर भाला फेंककर जीता ब्रॉन्ज मेडल

ग्लासगो/नई दिल्ली : ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के युवा भाला फेंक (जैवलिन थ्रो) खिलाड़ी यशवीर सिंह ने इतिहास रचते हुए ब्रॉन्ज मेडल (कांस्य पदक) अपने नाम कर लिया है। मुकाबले के अंतिम दौर तक 7वें स्थान पर पिछड़ रहे यशवीर ने ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा की एक जादुई सलाह पर अमल करते हुए अपने आखिरी प्रयास में 85.41 मीटर का थ्रो फेंककर भारत की झोली में पदक डाल दिया।

 नीरज चोपड़ा की वो ‘जादुई सलाह’ जिसने बदल दी बाजी

मुकाबले के अंतिम राउंड से ठीक पहले यशवीर सिंह 81.33 मीटर के थ्रो के साथ सातवें स्थान पर थे और पदक की दौड़ से लगभग बाहर हो चुके थे। तभी नीरज चोपड़ा ने उनसे कहा:

“भाले को फेंकते समय एक सीधी लाइन में रखो, कान के पास सही पकड़ बनाकर कंधों को सामने रखो और हाथ पीछे खींचकर उसी सीध में थ्रो करो।”

यशवीर ने नीरज की इस सलाह को अपने अंतिम प्रयास में लागू किया। नतीजा यह रहा कि उनका थ्रो सीधे 85.41 मीटर दूर जाकर गिरा और उन्होंने चमत्कारिक रूप से ब्रॉन्ज मेडल पर कब्जा जमा लिया।

 कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: जैवलिन थ्रो का फाइनल रिजल्ट

  • गोल्ड मेडल: रूमेश थरंगा पथिरागे (श्रीलंका) – 89.75 मीटर

  • सिल्वर मेडल: नीरज चोपड़ा (भारत) – 85.83 मीटर

  • ब्रॉन्ज मेडल: यशवीर सिंह (भारत) – 85.41 मीटर

  • अरशद नदीम का निराशाजनक प्रदर्शन: पेरिस ओलंपिक 2024 के गोल्ड मेडलिस्ट पाकिस्तान के अरशद नदीम (77.41 मीटर थ्रो) तीसरे राउंड के बाद ही बाहर हो गए और टॉप-8 में भी जगह नहीं बना सके।

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 “मुझ पर कोई दबाव नहीं था, ध्यान सिर्फ 100% देने पर था”— यशवीर सिंह

दिल्ली लौटने पर मीडिया से बातचीत में यशवीर ने कहा कि मीडिया और फैंस का सारा ध्यान नीरज चोपड़ा, अरशद नदीम और एंडरसन पीटर्स जैसे बड़े सितारों पर था। बिना किसी मानसिक दबाव के खेलने का उन्हें पूरा फायदा मिला और वे अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देने में सफल रहे।