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कन्या महाविद्यालय  बी.ए. तृतीय वर्ष की छात्राओं के लिए भूगोल विभाग द्वारा भौगोलिक भ्रमण का आयोजन किया गया

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कन्या महाविद्यालय  बी.ए. तृतीय वर्ष की छात्राओं के लिए भूगोल विभाग द्वारा भौगोलिक भ्रमण का आयोजन किया गय

शासकीय कन्या महाविद्यालय कटनी में बी.ए. तृतीय वर्ष की छात्राओं के लिए भूगोल विभाग द्वारा 28 मार्च 2025 को एक भौगोलिक भ्रमण का आयोजन किया गया। यह भ्रमण महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. चित्रा प्रभात के मार्गदर्शन और भूगोल विभाग के अध्यक्ष श्री के.जे. सिन्हा के नेतृत्व में संपन्न हुआ। इस अवसर पर स्ववित्तीय अतिथि विद्वान प्रेमलाल कांवरे ने भी छात्राओं को भ्रमण के लिए प्रोत्साहित किया। भ्रमण दल में डॉ. के.जी. सिंह, श्रीमती देववती चक्रवती, मनीषा दाहिया सहित 26 छात्राएं शामिल रहीं। यह भ्रमण भारतीय भू-भाग के भौगोलिक केंद्र बिंदु पर केंद्रित था, जो कटनी जिले के करौंदी के निकट मनोहर गांव में स्थित है। इस केंद्र बिंदु की स्थापना भारत सरकार द्वारा 1987 में की गई थी और यह वह स्थान है जहां से भारत की उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम की सीमाएं समान दूरी पर मानी जाती हैं।

भ्रमण के दौरान छात्राओं ने इस महत्वपूर्ण भौगोलिक स्थल का अवलोकन किया और इसके ऐतिहासिक एवं भौगोलिक महत्व को समझा। इसके पश्चात भ्रमण दल महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय, करौंदी पहुंचा। वहां छात्राओं ने विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय, सामाजिक विज्ञान संकाय, कंप्यूटर लैब और पुस्तकालय में उपलब्ध संसाधनों को देखा। इस दौरान उन्होंने वहां अध्ययनरत विद्यार्थियों और प्राध्यापकों से संवाद किया और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। विश्वविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण और आधुनिक सुविधाओं ने छात्राओं को प्रभावित किया।

भ्रमण की श्रृंखला में अगला पड़ाव बहोरीबंद के निकट स्थित रूपनाथ मंदिर था। यहां छात्राओं ने मंदिर के दर्शन किए और 2257 वर्ष पुराने शिलालेख का अवलोकन किया। यह शिलालेख पाली भाषा में अंकित है और प्राचीन भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण साक्ष्य है। शिलालेख को देखकर छात्राओं ने उस समय की लेखन कला और भाषा के बारे में जानकारी प्राप्त की। इसके बाद भ्रमण दल तिग्मा पहुंचा, जहां पांचवीं सदी में निर्मित कंकाली देवी मंदिर के दर्शन किए गए। इस मंदिर की विशेषता इसकी चपटी छत है, जो उस समय की वास्तुकला का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करती है। मंदिर की दीवारों, खंभों और दरवाजों पर की गई चित्रकारियां उस काल की कला और संस्कृति को जीवंत रूप में प्रदर्शित करती हैं। छात्राओं ने इन चित्रों को ध्यान से देखा और प्राचीन काल की कलात्मकता को समझा।

यह भ्रमण छात्राओं के लिए अत्यंत उत्साहवर्धक और प्रेरणादायक सिद्ध हुआ। इस यात्रा ने उन्हें न केवल भौगोलिक ज्ञान से समृद्ध किया, बल्कि ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक दृष्टिकोण से भी नई अंतर्दृष्टि प्रदान की। भूगोल विभाग के इस प्रयास ने छात्राओं को किताबी ज्ञान से आगे बढ़कर व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने का अवसर दिया। यह भ्रमण उनके शैक्षणिक जीवन का एक यादगार अनुभव बन गया, जो भविष्य में उनकी पढ़ाई और अनुसंधान में सहायक सिद्ध होगा।

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