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Gallbladder Stone in Youth: कम उम्र में ही क्यों हो रही पित्त की थैली में पथरी? एक्सपर्ट से जानें इसके पीछे की बड़ी वजह और बचाव के उपाय

नई दिल्ली: आमतौर पर बढ़ती उम्र की बीमारी मानी जाने वाली पथरी (Stone) अब कॉलेज जाने वाले छात्रों, जिम जाने वाले युवाओं और वर्किंग प्रोफेशनल्स को तेजी से अपना शिकार बना रही है। सर गंगाराम हॉस्पिटल (नई दिल्ली) के इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के वाइस चेयरमैन डॉ. पीयूष रंजन के मुताबिक, सामान्य आबादी (General Population) में करीब 7 फीसदी लोग गॉल स्टोन से पीड़ित हैं। पित्त की थैली में पथरी होने पर पेट के बीच में और दाईं (Right) तरफ असहनीय दर्द होता है। समय पर ध्यान न देने पर यह समस्या यूरिन इन्फेक्शन, पेट में तेज जलन और गंभीर लिवर समस्याओं का कारण बन सकती है।

Gallbladder Stone in Youth: कम उम्र में ही क्यों हो रही पित्त की थैली में पथरी? एक्सपर्ट से जानें इसके पीछे की बड़ी वजह और बचाव के उपाय

 गॉल ब्लैडर में पथरी होने के मुख्य प्रकार

डॉक्टरों के मुताबिक पित्त की थैली की पथरी मुख्य रूप से दो तरह की होती है:

  • कोलेस्ट्रॉल स्टोन (Cholesterol Stones): यह शरीर में कोलेस्ट्रॉल का मेटाबॉलिज्म बिगड़ने या गॉल ब्लैडर की अंदरूनी परत (Interlining) में खराबी के कारण बनती है। जेनेटिक (आनुवंशिक) कारण भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।
  • पिगमेंट स्टोन (Pigment Stones): ये छोटे और काले रंग के होते हैं।

कम उम्र (Young Age) में पथरी होने की असली वजह क्या है?

डॉ. पीयूष रंजन बताते हैं कि युवाओं में कोलेस्ट्रॉल से ज्यादा पिगमेंट स्टोन की समस्या देखी जा रही है।

  • हीमोलिसिस (Hemolysis): युवाओं के शरीर में जब ‘हीमोलिसिस’ यानी ब्लड टूटने की प्रक्रिया होती है, तब पिगमेंट स्टोन का निर्माण तेजी से होता है।
  • मेटाबॉलिक डिसऑर्डर: जिन युवाओं को मेटाबॉलिक समस्याएं या डायबिटीज की शुरुआत होती है, उनमें कम उम्र में भी कोलेस्ट्रॉल स्टोन बनने लगते हैं।
  • एक्सपर्ट की राय: डॉक्टर साफ करते हैं कि अगर गॉल ब्लैडर में पथरी के लक्षण (असहनीय दर्द, उल्टी, अपच) नजर आने लगें, तो इसका एकमात्र स्थाई इलाज सर्जरी (दूरबीन विधि से गॉल ब्लैडर निकालना) ही है।

 इन 4 खराब आदतों से बढ़ता है गॉल स्टोन का खतरा

पित्त (Bile) में जब कोलेस्ट्रॉल या बिलीरुबिन की मात्रा जरूरत से ज्यादा बढ़ जाती है, तो वह पथरी का रूप ले लेती है। इसके लिए हमारी ये आदतें जिम्मेदार हैं:

  • क्रैश डाइटिंग या तेजी से वजन घटाना (Rapid Weight Loss): आजकल जीरो फिगर या अचानक वजन कम करने के चक्कर में युवा भूखे रहते हैं। तेजी से वजन घटने पर लिवर ज्यादा कोलेस्ट्रॉल छोड़ने लगता है, जिससे पथरी का रिस्क बढ़ जाता है।
  • ब्रेकफास्ट स्किप करना (खाना छोड़ने की आदत): सुबह का नाश्ता न करने या लंबे समय तक खाली पेट रहने से गॉल ब्लैडर में पित्त जमा रहता है और गाढ़ा होकर पथरी बन जाता है। इससे डायबिटीज का खतरा भी बढ़ता है।
  • ज्यादा ऑयली और प्रोसेस्ड फूड: समोसे, पकौड़े, पिज्जा, बर्गर और अत्यधिक तली-भुनी चीजें पित्त में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को अनियंत्रित कर देती हैं।
  • कम पानी पीना और अत्यधिक गर्मी: कम पानी पीने और ज्यादा गर्मी वाले इलाकों में रहने से शरीर डिहाइड्रेट होता है, जो किडनी और गॉल ब्लैडर दोनों की पथरी को ट्रिगर करता है।

 गॉल स्टोन के रिस्क को कम करने के अचूक उपाय (Prevention Tips)

गॉल ब्लैडर की पथरी के खतरे को पूरी तरह खत्म तो नहीं किया जा सकता, लेकिन अपनी डाइट में ये बदलाव करके इसके रिस्क को बेहद कम किया जा सकता है:

क्या करें? क्या न करें?
हाई फाइबर डाइट लें: ओट्स, दालें, फल, हरी सब्जियां और साबुत अनाज खाएं। फास्ट वेट लॉस से बचें: वजन धीरे-धीरे और हेल्दी तरीके से कम करें, भूखे न रहें।
समय पर खाएं: हर दिन भोजन का एक निश्चित समय तय करें, खासकर नाश्ता कभी न छोड़ें। बैड फैट्स को कहें ना: रिफाइंड तेल, डालडा, डालडा घी और पैकेट बंद चिप्स-नमकीन से दूरी बनाएं।
हाइड्रेटेड रहें: दिनभर में कम से कम 3 से 4 लीटर पानी जरूर पीएं ताकि टॉक्सिन्स बाहर निकल सकें। लक्षणों को इग्नोर न करें: पेट के दाहिने हिस्से में लगातार होने वाले दर्द को मामूली गैस न समझें।

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