Gajab भोपाल एम्स के डाक्टरों ने 14 दिन कृत्रिम फेफड़ों से सांस देकर बचाई महिला की जान

Gajab भोपाल एम्स के डाक्टरों ने एक महिला के फेफेड़े खराब होने पर कृत्रिम फेफड़े से 14 दिन सांस देकर जान बचाने का स्तुत्य काम किया। महिला 27 मार्च को गंभीर हालत में एम्स पहुंची तो यहां के डाक्टरों ने कृत्रिम लंग्स से सांस देकर उसकी जान बचाई। इसमें एक्मो मशीन का उपयोग किया गया। प्रदेश में पहली बार किसी सरकारी अस्पताल में इस मशीन का उपयोग किया गया है। 42 दिन तक आइसीयू में इलाज पाने के बाद अब स्वस्थ है। बीते हफ्ते ही महिला को अस्पताल से छुट्टी हुई है।

आक्सीजन लेवल 42 प्रतिशत पर था

32 वर्षीय महिला मरीज को खांसी और सांस लेने में तकलीफ के चलते एम्स भोपाल एडमिट किया गया। मरीज का आक्सीजन लेवल 42 प्रतिशत पर था। जांच के बाद पता चला कि वह फेफड़े की गंभीर बीमारी एआरडीएस से पीड़ित है। संभवत: वायरल बुखार के चलते मरीज के फेफड़े बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे, जिससे वह शरीर को पर्याप्त मात्रा में आक्सीजन नहीं दे पा रहे थे। ऐसे में मरीज को तत्काल रेस्पिरेटरी इंटेंसिव केयर यूनिट (आरआइसीयू) में भर्ती किया गया। यहां मरीज की हालत को देखते हुए पहले वेंटीलेटर पर और बाद में करीब दो सप्ताह एक्मो मशीन पर रखा गया।

वेंटिलेटर से भी प्रतिकूल प्रभाव होता है

कई बार वेंटिलेटर से भी प्रतिकूल प्रभाव होता है। मरीज की स्थिति इतनी खराब थी कि वेंटिलेटर पर बहुत अधिक मात्रा में आक्सीजन देने पर भी सुधार नहीं हो रहा था। दूसरी ओर हाई प्रेशर आक्सीजन से मरीज को नुकसान भी होने का खतरा था। ऐसे में मरीज को एक्मो मशीन लगाने का निर्णय लिया गया। एक्मो लगाने के बाद वेंटीलेटर का फ्लो कम कर दिया गया। करीब दो सप्ताह तक मरीज को कृत्रिम तरीके से सांस दी गई और इस दौरान फेफड़े पूरी तरह आराम करते रहे।
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