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Fuel Price Hike: मिडिल ईस्ट की जंग से भारत में ‘महंगाई बम’ फटा; पेट्रोल-डीजल ₹3 महंगा, ₹100 के पार पहुंचा क्रूड ऑयल, अब दूध-राशन और भाड़ा बढ़ने का डर

Fuel Price Hike: मिडिल ईस्ट की जंग से भारत में 'महंगाई बम' फटा; पेट्रोल-डीजल ₹3 महंगा, ₹100 के पार पहुंचा क्रूड ऑयल, अब दूध-राशन और भाड़ा बढ़ने का डर

Fuel Price Hike: मिडिल ईस्ट की जंग से भारत में 'महंगाई बम' फटा; पेट्रोल-डीजल ₹3 महंगा, ₹100 के पार पहुंचा क्रूड ऑयल, अब दूध-राशन और भाड़ा बढ़ने का डर

Fuel Price Hike: मिडिल ईस्ट की जंग से भारत में ‘महंगाई बम’ फटा; पेट्रोल-डीजल ₹3 महंगा, ₹100 के पार पहुंचा क्रूड ऑयल, अब दूध-राशन और भाड़ा बढ़ने का डर।  भारत में पिछले काफी समय से शांत पड़ी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में शुक्रवार को अचानक भूचाल आ गया। तेल विपणन कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दामों में सीधे 3-3 रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी कर दी है। इस झटके के बाद देश के चारों महानगरों में तेल की कीमतें आसमान छूने लगी हैं।

Fuel Price Hike: मिडिल ईस्ट की जंग से भारत में ‘महंगाई बम’ फटा; पेट्रोल-डीजल ₹3 महंगा, ₹100 के पार पहुंचा क्रूड ऑयल, अब दूध-राशन और भाड़ा बढ़ने का डर

चारों महानगरों में तेल के नए दाम (प्रति लीटर):

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ईंधन महंगा होने से पहले ही देश में कई आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ चुके हैं, जिसने मध्यमवर्ग की कमर तोड़ दी है:

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इस महंगाई के पीछे कोई घरेलू कारण नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय युद्ध है:

  1. 90% आयात पर निर्भरता: भारत अपनी जरूरत का 90% कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है।

  2. होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) संकट: भारत का 50% कच्चा तेल इसी समुद्री रास्ते से आता है, जहां अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण तेल टैंकरों की आवाजाही ठप हो गई है।

  3. $100 के पार क्रूड: युद्ध से पहले जो कच्चा तेल 70 डॉलर प्रति बैरल था, वह अब 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर चुका है। इसी घाटे की भरपाई के लिए कंपनियों ने दाम बढ़ाए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि स्थिति नहीं सुधरी तो कीमतें और बढ़ेंगी।

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अंतरराष्ट्रीय संकट के बावजूद देश में इस मुद्दे पर सियासत गर्मा गई है:

सरकार और बीजेपी का तर्क: बीजेपी का कहना है कि युद्ध के कारण पड़ोसी देशों (पाकिस्तान, श्रीलंका) में कीमतें 15-20% तक बढ़ गईं, लेकिन भारत में नियंत्रण रखा गया। सरकार ने जनता को राहत देने के लिए पहले ही पेट्रोल पर स्पेशल एक्साइज ड्यूटी ₹13 से घटाकर ₹3 और डीजल पर शून्य कर दी थी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण आखिरकार दाम बढ़ाने पड़े।

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