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शीत लहर से बचाव हेतु जरूरतमंद लोगों को रेन बसेरा तक पहुंचाने की निःशुल्क वाहन सेवा निरंतर जारी,शीत लहर से बचाव हेतु रैन बसेरा पहुंचने  वाले नागरिक  उपलब्ध व्यवस्थाओं की कर रहे सराहना

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शीत लहर से बचाव हेतु जरूरतमंद लोगों को रेन बसेरा तक पहुंचाने की निःशुल्क वाहन सेवा निरंतर जारी,शीत लहर से बचाव हेतु रैन बसेरा पहुंचने  वाले नागरिक  उपलब्ध व्यवस्थाओं की कर रहे सराहन

कटनी  – शीतलहर के प्रभाव को देखते हुए नगर निगम प्रशासन द्वारा जरूरतमंद एवं बेसहारा लोगों के लिए संचालित रेन बसेरा वाहन सेवा लगातार जारी है। महापौर श्रीमती प्रीति संजीव सूरी एवं निगमायुक्त सुश्री तपस्या परिहार के निर्देश पर निगम की टीम रात्रि के समय शहर के प्रमुख मार्गों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन तथा सार्वजनिक स्थलों पर भ्रमण कर ऐसे जरूरतमंद व्यक्तियों को वाहन के माध्यम से बस स्टैंड स्थित रेन बसेरा तक सुरक्षित पहुंचा रही है, जिन्हें ठंड से बचाव हेतु आश्रय की आवश्यकता होती है।

निगम प्रशासन द्वारा प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी यह सेवा पूर्णतः निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही रेन बसेरा में ठहरने वाले व्यक्तियों के लिए कंबल, समुचित साफ-सफाई  पानी, शुद्ध पेयजल तथा आवश्यक सुविधाओं की भी प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

रैन बसेरा प्रभारी एवं निगम के राजस्व अधिकारी श्री जागेश्वर प्रसाद पाठक ने बताया कि मंगलवार रात्रि रैन बसेरा वाहन के माध्यम से नगर भ्रमण किया जाकर मुख्य स्टेशन के बाहर से दो जरूरतमंद लोगों को रैन बसेरा भेजने की कार्यवाही की गई। वहीं नगर के अन्य स्थलों से भी जरूरतमंदों को ठंड से बचाव हेतु रैन बसेरा भेजा गया। राजस्व अधिकारी श्री पाठक ने बताया कि रात्रि के दौरान रैन बसेरा की व्यवस्थाओं का औचक निरीक्षण करने पर वहां 47 पुरुष एवं 4 महिलाओं कुल 51 जरूरतमंद लोगों द्वारा रैन बसेरा की निःशुल्क सुविधा का लाभ उठाते हुए सुरक्षित एवं सुविधाजनक रूप से रात्रि विश्राम करते पाया गया। इस दौरान उपस्थित जनों से रैन बसेरा की निःशुल्क व्यवस्थाओं की जानकारी चाहे पर उनके द्वारा रैन बसेरा में उपलब्ध कराई जा रहीं व्यवस्थाओं के प्रति संतोष जाहिर किया गया।

निगम प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे शहर में किसी भी जरूरतमंद या बेघर व्यक्ति को ठंड में खुले स्थान पर देखे जाने पर रेन बसेरा वाहन सेवा तक सूचना पहुंचाकर सहयोग करें, ताकि किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति को रैन बसेरा आश्रय स्थल पहुंचाया जाकर शीतलहर के खतरे से बचाया जा सके।

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