फ्रांस हिंसा और अमेरिकी राजनीति: इमिग्रेशन बनाम आर्थिक असमानता पर छिड़ी बहस, 2,400 से अधिक गिरफ्तार
वाशिंगटन/पेरिस: फ्रांस में बढ़ती महंगाई, स्कूलों की खराब स्थिति और जीवनयापन की ऊंची लागत को लेकर भड़की हिंसा और आगजनी ने अब वैश्विक स्तर पर राजनीतिक बहस छेड़ दी है। इस घटना पर अमेरिका में सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। नवंबर 2026 में होने वाले अमेरिकी मिडटर्म (मध्यवधि) चुनावों से ठीक पहले इस मुद्दे ने ‘इमिग्रेशन बनाम आर्थिक असमानता’ का नया रूप ले लिया है।
अमेरिकी राजनीति में दो विरोधी दृष्टिकोण
जेडी वेंस (उपराष्ट्रपति) का दावा
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने फ्रांस के लिमोज शहर स्थित 140 साल पुराने ऐतिहासिक टाउन हॉल के जलने का वीडियो शेयर करते हुए पश्चिमी देशों की उदारवादी इमिग्रेशन नीतियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि विविधता और मानवीय संवेदनाओं के नाम पर पश्चिमी देशों ने गरीब देशों से लोगों को बुलाकर सांस्कृतिक और सामाजिक संतुलन बिगाड़ दिया है। वेंस ने अमेरिकी नागरिकों को चेतावनी देते हुए कहा कि डेमोक्रेट्स की नीतियां अमेरिका को भी इसी मोड़ पर ले जा सकती हैं।
रो खन्ना (डेमोक्रेटिक सांसद) का पलटवार
भारतीय मूल के डेमोक्रेटिक सांसद रो खन्ना ने वेंस के तर्कों को खारिज करते हुए इसे नैतिकता और जमीनी हकीकत दोनों लिहाज से गलत बताया। खन्ना के अनुसार, यूरोप में प्रदर्शन कर रहे युवाओं का मुख्य असंतोष बढ़ती आर्थिक असमानता, महंगे मकान, शिक्षा संकट और घटते रोजगार अवसरों को लेकर है। उन्होंने कहा कि जब संपत्ति और सत्ता कुछ हाथों में केंद्रित हो जाती है, तो युवाओं का गुस्सा फुटकर बाहर आता है।
फ्रांस में हालात गंभीर: 2,400 से ज्यादा गिरफ्तारियां
फ्रांस में पिछले कुछ दिनों से जारी हिंसक उपद्रव के खिलाफ राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सख्त कार्रवाई का आदेश दिया है:
देशभर में अब तक 2,400 से अधिक उपद्रवियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पेरिस, मार्सिले, ल्योन और लिमोज जैसे शहरों में 600 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए हैं और बड़े पैमाने पर लूटपाट व आगजनी हुई है। राष्ट्रपति मैक्रों ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि “जिन्होंने भी तबाही मचाई है और संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया है, उन्हें ही इसकी भरपाई करनी होगी।”
मिडटर्म चुनावों पर असर
नवंबर 2026 के अमेरिकी चुनाव से पहले रिपब्लिकन पार्टी इस घटना को इमिग्रेशन नियंत्रण और राष्ट्रीय सुरक्षा के अपने मुख्य एजेंडे को मजबूत करने के लिए भुना रही है। वहीं, डेमोक्रेट्स इसे आर्थिक सुधारों और मध्यम वर्ग की बुनियादी समस्याओं पर ध्यान आकर्षित करने के अवसर के रूप में देख रहे हैं।

