कटनी। मई में भीषण गर्मी की जगह मौसम बदला हुआ है। इस बार नौतपा में भी गर्मी नहीं होगी। पश्चिमी विक्षोभ के कारण उत्तर-पश्चिम भारत में लगातार बारिश हो रही है। जिससे तापमान कम है। अगले एक सप्ताह में भी तापमान 40 डिग्री से नीचे रहने की संभावना है। इस बार लू चलने के भी आसार नहीं हैं। भीषण गर्मी का पर्याय माने जाने वाले मई माह में इस बार मौसम का मिजाज खासा बदला हुआ है। लू चलना तो दूर की बात माह के ज्यादातर दिन तापमान भी सामान्य के आसपास या उससे नीचे ही रहा है। हैरानी की बात यह कि अब इस साल नौतपा भी दगा देने जा रहा है। माह के 23 दिनों में न अभी तक लू चली है और न शेष बचे दिनों में चलने के आसार हैं। पंडितों के अनुसार रविवार यानी 25 मई से सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश कर जाएगा और नौ दिन यानी दो जून तक इसी में रहेगा। इस दौरान धरती पर सूर्य की गर्मी का ताप बढ़ता है। नौतपा के शुरुआती पांच दिन तक आए दिन तापमान बढ़ने की संभावना रहती है। मान्यता है कि इस दिनों सूर्य सर्वाधिक बलवान रहता है, जिससे भीषण गर्मी पड़ती है। वैसे सूर्य रोहिंणी नक्षत्र में 15 दिनों तक रहता है लेकिन नौतपा शुरुआती नौ दिनों को ही कहा जाता है। पंडितों ने यह ीाी बताया कि नौतपा में सूर्य की तेज किरणें सीधे धरती पर पड़ती हैं, जिससे धरती का तापमान तेजी से बढ़ता है। अधिक गर्मी पड़ने के कारण मैदानी क्षेत्रों में निम्न दबाव का क्षेत्र बन जाता है, जिससे समुद्र की लहरें आकर्षित होती हैं। इसी के चलते अच्छी बरसात की संभावना भी बनती है लेकिन इस बार की स्थिति पिछले सालों की तुलना में जरा अलग है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार लगातार पश्चिमी विक्षोभ, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर दोनों से नमी के प्रवेश के साथ 22-23 दिनों के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत में लगातार गरज के साथ वर्षा हुई है। अधिकतम तापमान भी कम रहा है। अगले एक सप्ताह के दौरान भी तापमान अधिकतम 40 डिग्री से नीचे या इसके आसपास ही रहेगा। दिल्ली एनसीआर, हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बंगाल के साथ ही मध्य प्रदेश में भी कमोबेश यही स्थिति रहेगी।
25 मई से ही क्यों होती है नौतपा की शुरुआत
मई का महीना खत्म होने वाला है। गर्मी और बरसात दोनों का असर दिखाई दे रहा है। आज 25 मई रविवार से नौतपा शुरू हो गए हैं। ऐसे में चलिए जानते हैं कि नौतपा 25 मई से ही क्यों शुरू होते हैं। 26 या 27 मई से क्यों नहीं। नौतपा में सूर्य देवता आग उगलते हैं। पर क्या आप जानते हैं कि नौतपा की शुरुआत 25 मई से ही क्यों होती है। यदि नहीं तो चलिए जानते हैं इसके पीछे का धार्मिक और वैज्ञानिक कारण क्या है। नौतपा की शुरुआत आज 25 मई रविवार को ज्येष्ठ माह कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि से हो गई है। ज्योतिषाचार्य पंडित पुष्पेन्द्र द्विवेदी के अनुसार इनकी समाप्ति 3 जून को होगी।
नौतपा का वैज्ञानिक महत्व
जिस तरह जेष्ठ के महीने में नौतपा शुरू होने का एक धार्मिक कारण है। उसी तरह नौतपा का विज्ञान से भी संबंध है। मई के आखिरी सप्ताह में सूर्य और पृथ्वी के बीच दूरी सबसे कम हो जाती है और इससे धूप और तेज हो जाती है। वैज्ञानिक कारणों की बात करें तो जब सूर्य की किरणें सीधे पृथ्वी पर पड़ती हैं। तो इस बीच तापमान सबसे ज्यादा होता है। जब गर्मी ज्यादा होती है तो मैदानी क्षेत्रों में निम्न दबाव का क्षेत्र बनने लगता है। फिर यही क्षेत्र समुद्र की लहरों को आकर्षित करता है। इससे ठंडी हवाएं मैदानों की ओर बढ़ती हैं, चूंकि समुद्र को उच्च दबाव वाला क्षेत्र माना जाता है इसलिए हवाओं का रुख से अच्छी बारिश का अंदाजा लगाया जाता है।
मई का महीना खत्म होने वाला है। गर्मी और बरसात दोनों का असर दिखाई दे रहा है। आज 25 मई रविवार से नौतपा शुरू हो गए हैं। ऐसे में चलिए जानते हैं कि नौतपा 25 मई से ही क्यों शुरू होते हैं। 26 या 27 मई से क्यों नहीं। नौतपा में सूर्य देवता आग उगलते हैं। पर क्या आप जानते हैं कि नौतपा की शुरुआत 25 मई से ही क्यों होती है। यदि नहीं तो चलिए जानते हैं इसके पीछे का धार्मिक और वैज्ञानिक कारण क्या है। नौतपा की शुरुआत आज 25 मई रविवार को ज्येष्ठ माह कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि से हो गई है। ज्योतिषाचार्य पंडित पुष्पेन्द्र द्विवेदी के अनुसार इनकी समाप्ति 3 जून को होगी।
नौतपा का वैज्ञानिक महत्व
जिस तरह जेष्ठ के महीने में नौतपा शुरू होने का एक धार्मिक कारण है। उसी तरह नौतपा का विज्ञान से भी संबंध है। मई के आखिरी सप्ताह में सूर्य और पृथ्वी के बीच दूरी सबसे कम हो जाती है और इससे धूप और तेज हो जाती है। वैज्ञानिक कारणों की बात करें तो जब सूर्य की किरणें सीधे पृथ्वी पर पड़ती हैं। तो इस बीच तापमान सबसे ज्यादा होता है। जब गर्मी ज्यादा होती है तो मैदानी क्षेत्रों में निम्न दबाव का क्षेत्र बनने लगता है। फिर यही क्षेत्र समुद्र की लहरों को आकर्षित करता है। इससे ठंडी हवाएं मैदानों की ओर बढ़ती हैं, चूंकि समुद्र को उच्च दबाव वाला क्षेत्र माना जाता है इसलिए हवाओं का रुख से अच्छी बारिश का अंदाजा लगाया जाता है।
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