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SC-ST एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कटनी जिला स्तरीय सतर्कता समिति का पुनर्गठन; सांसदों व विधायकों सहित 22 सदस्य शामिल, हर 3 माह में होगी मुकदमों की समीक्षा

लंबित आवेदनों पर सख्त प्रशासन, पंचायत सचिवों पर कार्रवाई के निर्देश

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SC-ST एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कटनी जिला स्तरीय सतर्कता समिति का पुनर्गठन; सांसदों व विधायकों सहित 22 सदस्य शामिल, हर 3 माह में होगी मुकदमों की समीक्षा।  अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के कड़े और प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ पीड़ितों को समय पर राहत और पुनर्वास सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए कटनी प्रशासन ने बड़ी पहल की है। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्री आशीष तिवारी ने जिले में ‘जिला स्तरीय सतर्कता एवं मॉनिटरिंग समिति’ का विधिवत पुनर्गठन कर दिया है।

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SC-ST एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कटनी जिला स्तरीय सतर्कता समिति का पुनर्गठन; सांसदों व विधायकों सहित 22 सदस्य शामिल, हर 3 माह में होगी मुकदमों की समीक्षा

इस नव-पुनर्गठित हाई-प्रोफाइल समिति में क्षेत्र के प्रमुख जनप्रनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं सहित कुल 22 सदस्यों को शामिल किया गया है, जो सीधे तौर पर जिले में कानून व्यवस्था और पीड़ितों के पुनर्वास की निगरानी करेंगे।

समिति का स्वरूप: अध्यक्ष से लेकर गैर-सरकारी सदस्यों तक पूरी सूची:

अध्यक्ष व सांसद-विधायक (प्रमुख राजनीतिक सदस्य):

समिति की कमान स्वयं कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्री आशीष तिवारी (अध्यक्ष) के हाथों में होगी। इसके अलावा समिति में राष्ट्रीय व राज्य स्तर के दिग्गजों को बतौर सदस्य शामिल किया गया है:

शासकीय एवं राजपत्रित अधिकारी:

प्रशासनिक और कानूनी तालमेल बिठाने के लिए शासकीय सदस्यों के रूप में पुलिस अधीक्षक (SP) कटनी, जिला लोक अभियोजन अधिकारी (DPO) न्यायालय और अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के जिला संयोजक को शामिल किया गया है। वहीं, राजपत्रित अधिकारियों की श्रेणी में जिला रोजगार अधिकारी श्री डी.के. पासी, महिला सशक्तिकरण अधिकारी सुश्री वनश्री कुरवेती और सहकारिता एवं सहायक पंजीयक श्री राजयश वर्धन कुरील को सदस्य नियुक्त किया गया है।

गैर-सरकारी सदस्य और NGO प्रतिनिधि:

समाज के अंतिम छोर की आवाज को समिति में प्राथमिकता देने के लिए अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग से 8 गैर-सरकारी सदस्यों को जगह दी गई है, जिनमें श्री रूपा दाहिया, श्री जया बैस, श्री मनोज चौधरी, श्री शिवकुमार चौधरी (बबलू), श्री रतिराम कोल, श्री रमेश कोल (मदारी), श्री अनिल बागरी और श्री राजेश चौधरी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, गैर-सरकारी संगठनों (NGO) की श्रेणी से प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता सुश्री राजेन्द्रर कौर लाम्बा को भी इस टीम का हिस्सा बनाया गया है।

हर तीन माह में होगी बैठक, कोर्ट केसों की होगी सघन समीक्षा

कलेक्टर श्री आशीष तिवारी ने स्पष्ट किया है कि इस सतर्कता एवं मॉनिटरिंग समिति की कार्यप्रणाली को पूरी तरह सक्रिय रखा जाएगा। नियमानुसार, कम से कम तीन माह में एक बार समिति की उच्चस्तरीय बैठक आयोजित करना अनिवार्य होगा

इस त्रैमासिक बैठक के दौरान जिले के विभिन्न न्यायालयों में चल रहे अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (SC-ST Act) के अंतर्गत दर्ज मुकदमों की सघन समीक्षा की जाएगी। समिति यह सुनिश्चित करेगी कि मामलों में गवाहों को सुरक्षा मिले, जांच समय पर पूरी हो और पीड़ितों को शासन की ओर से मिलने वाली आर्थिक व पुनर्वास सहायता बिना किसी देरी के सीधे प्राप्त हो सके।

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