भगवान की यात्रा के लिए थम जाएंगी उड़ानें: तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट पर 5 घंटे बंद रहेगा रनवे, 1932 से चली आ रही अनोखी परंपरा
राष्ट्रीय डेस्क, Yashbharat.com। क्या आपने कभी सुना है कि भगवान की धार्मिक यात्रा के लिए किसी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर विमानों की आवाजाही रोक दी जाए? देश में एक ऐसा अनूठा एयरपोर्ट है, जहाँ न तो किसी तकनीकी खराबी और न ही खराब मौसम की वजह से, बल्कि सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा को निभाने के लिए उड़ानों का पहिया थम जाता है। यह अनोखी परंपरा केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में आज भी पूरी निष्ठा के साथ निभाई जा रही है।
20 अक्टूबर को शाम 4 से रात 9 बजे तक बंद रहेंगी उड़ानें
तिरुवनंतपुरम इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (TIAL) के अनुसार, प्रसिद्ध श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर की पारंपरिक ‘अल्पासी आराट्टू’ शोभायात्रा के लिए 20 अक्टूबर को शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक विमानों का परिचालन पूरी तरह निलंबित रहेगा। इस दौरान कोई भी फ्लाइट न तो टेकऑफ करेगी और न ही लैंड होगी। एयरपोर्ट प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे अपनी संबंधित एयरलाइंस से फ्लाइट का समय चेक करके ही घर से निकलें।
क्या है ‘अल्पासी आराट्टू’ की पवित्र परंपरा?
‘अल्पासी आराट्टू’ श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर से जुड़ी एक ऐतिहासिक धार्मिक शोभायात्रा है। इसमें मंदिर की पवित्र मूर्तियों को बड़े विधि-विधान के साथ शंगुमुघम बीच (समुद्र तट) ले जाया जाता है, जहाँ उन्हें पवित्र स्नान कराया जाता है। स्नान के बाद मूर्तियां वापस मंदिर लाई जाती हैं। इस शोभायात्रा का पारंपरिक मार्ग एयरपोर्ट के रनवे से होकर गुजरता है, इसलिए भगवान की यात्रा को रास्ता देने के लिए पूरे रनवे को खाली करा दिया जाता है।
1932 से कायम है त्रावणकोर रियासत का यह नियम
इस भव्य और पावन परंपरा का इतिहास साल 1932 से जुड़ा है। उस समय त्रावणकोर रियासत के तत्कालीन राजा श्री चिथिरा थिरुनाल ने यह ऐतिहासिक व्यवस्था तय की थी कि एयरपोर्ट साल में 363 दिन आम जनता और विमानों के लिए खुला रहेगा, जबकि 2 दिन भगवान पद्मनाभस्वामी की शोभायात्रा के लिए आरक्षित रहेंगे।
जब 1932 में तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट की स्थापना हुई, तब से लेकर आज तक (साल में दो बार होने वाली आराट्टू यात्रा के दौरान) इस नियम का पूरी श्रद्धा के साथ पालन किया जा रहा है।
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