भोपाल/ग्वालियर। ऑटोमैटिक फिटनेस सेंटर जांच को लेकर मध्य प्रदेश परिवहन विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। प्रदेशभर के आरटीओ अब सात दिन में यह रिपोर्ट देंगे कि मध्य प्रदेश में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों और कागजों पर ‘फिट’ घोषित अनफिट वाहनों द्वारा मचाई जा रही तबाही को देखते हुए मध्य प्रदेश परिवहन विभाग सख्त रुख में आ गया है। हाल ही में ग्वालियर स्थित प्रसिद्ध शीतला माता मंदिर के प्रवेश द्वार पर हुए भीषण ट्रक हादसे में 15 से अधिक लोगों की दर्दनाक मौत और 42 लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की दिल दहला देने वाली घटना ने विभागीय तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे में शुरुआती जांच के दौरान ब्रेक फेल होने और ओवरलोडिंग की बात सामने आने के बाद अब पूरे प्रदेश में स्थापित ऑटोमैटिक फिटनेस सेंटर जांच का महाअभियान शुरू किया जा रहा है।
परिवहन विभाग के आला अधिकारियों ने सख्त निर्देश दिए हैं कि प्रदेशभर के सभी क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (RTO) अगले सात दिनों के भीतर अपने-अपने जिलों में संचालित ऑटोमैटिक फिटनेस सेंटरों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।
3 महीने के डेटा का होगा विस्तृत ऑडिट
इस विशेष ऑटोमैटिक फिटनेस सेंटर जांच अभियान के तहत जिलों के RTO अधिकारी पिछले तीन महीनों (90 दिनों) में पास किए गए सभी व्यावसायिक और भारी वाहनों का संपूर्ण डेटा खंगालेंगे।
इस ऑडिट में मुख्य रूप से इन बिंदुओं का परीक्षण किया जाएगा:
- तकनीकी निष्पक्षता: क्या वाहनों की ब्रेक, स्टीयरिंग, हेडलाइट्स और प्रदूषण मानकों की ऑटोमैटिक मशीन जांच में नियमों का पूरी तरह पालन हुआ है?
- फर्जीवाड़ा और बाईपास रोको: क्या किसी वाहन को बिना भौतिक या मशीनी परीक्षण के सिस्टम में गलत तरीके से ‘फिटनेस सर्टिफिकेट’ (FC) जारी तो नहीं कर दिया गया?
अधिकारियों की जवाबदेही: जिन ऑटोमैटिक फिटनेस सेंटर जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी पाई जाएगी, उन सेंटरों के लाइसेंस रद्द करने के साथ-साथ संबंधित ऑपरेटरों पर आपराधिक मामला दर्ज कराया जाएगा।
40 ऑटोमैटिक फिटनेस सेंटरों की कार्यप्रणाली पर संशय
वर्तमान में मध्य प्रदेश में कुल 40 ऑटोमैटिक फिटनेस सेंटर सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। सरकार ने पारदर्शी व्यवस्था बनाने और मानवीय हस्तक्षेप कम करने के उद्देश्य से ऑटोमैटिक टेस्टिंग स्टेशनों (ATS) को अनिवार्य किया था।
हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि कई सेंटर मात्र औपचारिकता निभा रहे हैं। सड़क पर दौड़ने लायक न होने के बावजूद व्यावसायिक वाहन फिटनेस प्रमाण पत्र हासिल कर लेते हैं, जिससे निर्दोष लोगों की जान पर बन आती है। इस 7-दिवसीय गहन ऑटोमैटिक फिटनेस सेंटर जांच से यह स्पष्ट होगा कि इन सेंटरों पर नियम कायदों का कितना पालन हो रहा है और कहां गंभीर लापरवाही बरती जा रही है।
ग्वालियर शीतला माता मंदिर हादसा: वह त्रासदी जिसने व्यवस्था हिला दी
ग्वालियर के शीतला माता मंदिर के पास हुए खौफनाक हादसे ने परिवहन सुरक्षा के दावों की धज्जियां उड़ा दी थीं। धान से लदा एक बेकाबू ट्रक बैरिकेड तोड़ता हुआ मंदिर के गेट और श्रद्धालुओं की भीड़ में जा घुसा था।
हादसे की मुख्य वजहें:
- ढलान पर अनियंत्रित ट्रक का ब्रेक अचानक फेल हो जाना।
क्षमता से कहीं अधिक वजन (ओवरलोडिंग) लदा होना।
प्रतिबंधित सड़क पर भारी वाहन का प्रवेश कर जाना।
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इस हादसे के बाद जब यह सवाल उठा कि सड़क पर दौड़ रहे भारी वाहन वास्तव में फिट हैं भी या नहीं, तब जाकर परिवहन विभाग ने राज्य स्तर पर व्यापक ऑटोमैटिक फिटनेस सेंटर जांच कराने का फैसला लिया है।
सात दिनों में रिपोर्ट न देने पर RTO अधिकारियों पर गिरेगी गाज
परिवहन आयुक्त कार्यालय से जारी दिशा-निर्देशों में स्पष्ट कहा गया है कि यदि तय सीमा (7 दिन) के भीतर किसी जिले का ऑटोमैटिक फिटनेस सेंटर जांच का ब्योरा विभाग को प्राप्त नहीं होता है या रिपोर्ट में किसी भी प्रकार की लीपापोती पाई जाती है, तो संबंधित RTO अधिकारी के विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
विभाग का मानना है कि यदि ऑटोमैटिक फिटनेस सेंटरों की सख्त स्क्रूटनी नियमित रूप से की जाए, तो सड़क पर दौड़ रहे ‘चलते-फिरते काल’ बन चुके अनफिट वाहनों पर समय रहते लगाम लगाई जा सकती है।















