कटनी में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए किसान पंजीयन 15 सितंबर से: जिले में बने 51 केंद्र, एग्रीस्टेक पोर्टल से होगा भूमि व फसल का सत्यापन

कटनी में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए किसान पंजीयन 15 सितंबर से: जिले में बने 51 केंद्र, एग्रीस्टेक पोर्टल से होगा भूमि व फसल का सत्यापन
कटनी: खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के तहत समर्थन मूल्य (MSP) पर धान उपार्जन के लिए किसानों के पंजीयन की प्रक्रिया 15 सितंबर से शुरू होने जा रही है। यह प्रक्रिया 10 अक्टूबर 2026 तक जारी रहेगी। कलेक्टर श्री आशीष तिवारी के निर्देशानुसार जिले में पंजीयन कार्य के लिए 51 केंद्र बनाए गए हैं। रविवार और शासकीय अवकाश को छोड़कर सभी कार्य दिवसों में पंजीयन का काम किया जाएगा।
एग्रीस्टेक डाटाबेस से होगा पारदर्शी सत्यापन
इस वर्ष किसान पंजीयन प्रक्रिया को ‘एग्रीस्टेक डाटाबेस’ से जोड़ा गया है।
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वास्तविक भूमि व फसल का मिलान: पंजीयन के दौरान किसान के स्वामित्व वाले खसरे, रकबे और बोई गई फसल की पूरी जानकारी सीधे एग्रीस्टेक से ली जाएगी, जिससे गड़बड़ी की संभावना खत्म होगी।
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यूनिक कोड और फार्मर आईडी: ई-उपार्जन पोर्टल के एग्रीस्टेक से जुड़ने के कारण किसान का ‘यूनिक कोड’ और ‘एग्रीस्टेक फार्मर आईडी’ भी डेटा में दर्ज होगा।
पुराने और नए किसानों के लिए पंजीयन की व्यवस्था
पंजीयन केंद्रों पर दो अलग-अलग विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं:
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पुराने (विगत वर्ष पंजीकृत) किसान: पिछले साल के किसान अपने आधार नंबर, समग्र परिवार आईडी, मोबाइल नंबर, एग्रीस्टेक किसान आईडी या पुरानी पंजीयन आईडी दर्ज कर अपना विवरण प्राप्त कर सकेंगे और जरूरत होने पर सुधार करा सकेंगे।
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नए किसान: नवीन किसानों को आवेदन पत्र में अपनी पूरी जानकारी दर्ज कर नया पंजीयन कराना होगा।
आधार ओटीपी व बायोमैट्रिक अनिवार्य
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आधार सत्यापन: पंजीयन के लिए सही आधार नंबर दर्ज करना अनिवार्य होगा।
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बायोमैट्रिक / OTP: आधार का बायोमैट्रिक या ओटीपी सत्यापन होने के बाद ही यूआईडीएआई (UIDAI) डेटाबेस से जानकारी ई-उपार्जन पोर्टल पर आएगी।
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नाम का मिलान: किसान के नाम और विवरण का आधार डेटा से शत-प्रतिशत मिलान होने पर ही पंजीयन सबमिट होगा।
यदि एग्रीस्टेक में खसरा दर्ज न हो तो क्या करें?
यदि किसी किसान के सभी खसरे एग्रीस्टेक पोर्टल पर उपलब्ध नहीं हैं, तो वे संबंधित क्षेत्र के पटवारी, सीएससी (CSC), ग्राम सहायक या ‘फार्मर रजिस्ट्री एमपी’ (Farmer Registry MP) मोबाइल ऐप के माध्यम से अपने शेष खसरे एग्रीस्टेक डेटाबेस में जुड़वा सकते हैं।








