Family Court News: गंभीर बीमारी छिपाकर शादी करना पड़ा भारी, जबलपुर की निकिता दुबे को मिला इंसाफ, जानें पूरा मामला
Family Court News: गंभीर बीमारी छिपाकर शादी करना पड़ा भारी, जबलपुर की निकिता दुबे को मिला इंसाफ, जानें पूरा मामला। कुटुंब न्यायालय के तृतीय अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश मुकेश कुमार दांगी की अदालत ने एक अहम मामले की सुनवाई करते हुए पत्नी के हक में विवाह विच्छेद (तलाक) का आदेश पारित किया है। कोर्ट ने पति और उसके परिवार द्वारा गंभीर बीमारी (मिर्गी) छिपाकर शादी करने के आचरण को गलत माना।
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Family Court News: गंभीर बीमारी छिपाकर शादी करना पड़ा भारी, जबलपुर की निकिता दुबे को मिला इंसाफ, जानें पूरा मामला
शादी के दो महीने बाद खुली पोल
मामला गढ़ा, गंगानगर निवासी निकिता दुबे का है, जिनका विवाह मंडला के जितेन्द्र दुबे के साथ हुआ था।शादी के महज दो महीने बाद ही एक दिन अचानक निकिता के पति जितेन्द्र को मिर्गी का दौरा पड़ा।जब निकिता ने घबराकर सास-ससुर को बुलाया, तो उन्होंने गुपचुप तरीके से कोई दवाई पिला दी। पूछने पर ससुराल वालों ने इसे मामूली तबीयत खराब होना बताया, जबकि असल में जितेन्द्र को लंबे समय से मिर्गी की बीमारी थी।
अदालत में दलीलें
निकिता की ओर से अधिवक्ता राजेश राय, आकाश राय और प्रमित पांडे ने कोर्ट में मजबूती से पक्ष रखा। वकीलों ने दलील दी कि:
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पति और ससुराल पक्ष ने विवाह के समय जानबूझकर बीमारी की बात छिपाई, जो कि धोखेबाजी की श्रेणी में आता है।
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ऐसी स्थिति में पत्नी के मानसिक स्वास्थ्य और भविष्य पर बुरा असर पड़ता है।
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गंभीर बीमारी की जानकारी होने के बावजूद उसे सामान्य बताना और उपचार के बारे में पारदर्शिता न रखना अनुचित है।
कोर्ट का फैसला: विवाह विच्छेद मंजूर
सभी तथ्यों और गवाहों के आधार पर न्यायाधीश मुकेश कुमार दांगी की अदालत ने माना कि बीमारी छिपाकर किया गया विवाह आधारहीन है। कोर्ट ने निकिता दुबे की अर्जी स्वीकार करते हुए विवाह विच्छेद का आदेश जारी कर दिया।
कानूनी नजरिया: यह फैसला उन लोगों के लिए एक नजीर है जो वैवाहिक संबंधों की शुरुआत झूठ या जानकारी छिपाकर करते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि सच्चाई छिपाना क्रूरता और धोखाधड़ी का हिस्सा माना जाएगा।

