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मल्हारगढ़ पुलिस पर ‘फर्जी केस’ विवाद: हाईकोर्ट में पेश हुए SP, कहा– सोहनलाल के बैग से मिली थी अफीम; फैसला सुरक्षित

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मल्हारगढ़ पुलिस पर ‘फर्जी केस’ विवाद: हाईकोर्ट में पेश हुए SP, कहा– सोहनलाल के बैग से मिली थी अफीम; फैसला सुरक्षित।मल्हारगढ़ पुलिस पर अफीम तस्करी का फर्जी केस बनाने के आरोपों को लेकर हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में चल रही सुनवाई के दौरान मंगलवार को मंदसौर एसपी विनोद कुमार मीना स्वयं अदालत में पेश हुए। उन्होंने न्यायाधीश को बताया कि “अफीम बरामदगी पूरी तरह वैध है और 2.50 किलो अफीम आरोपित सोहनलाल के बैग से ही मिली थी।”

सरकारी वकील के माध्यम से सीसीटीवी फुटेज भी कोर्ट में पेश किए, जिनमें सोहनलाल पीठ पर बैग टांगे नजर आ रहा है।

एसपी मीना ने अदालत में यह भी स्वीकार किया कि कार्रवाई के दौरान पुलिसकर्मियों ने प्रक्रिया में गंभीर त्रुटियां की थीं, जिसके चलते निरीक्षक राजेंद्र पंवार, उनि साजिद मंसूरी, संजय प्रतापसिंह सहित आरक्षक नरेंद्र, जितेंद्र और दिलीप जाट को निलंबित किया गया है। इनके खिलाफ विभागीय जांच एएसपी तेरसिंह बघेल को सौंपी गई है।

एसपी के बयान और फुटेज देखने के बाद न्यायमूर्ति सुबोध अभयंकर ने निर्णय सुरक्षित रख लिया। मंगलवार शाम तक आदेश जारी नहीं हुआ था

।क्या है पूरा मामला?

अगस्त 2025 में मल्हारगढ़ पुलिस ने सोहनलाल पुत्र बाबूलाल कंचन मिरासी (निवासी– जिला बालोतरा, राजस्थान) को गिरफ्तार किया था और उसके पास से 2.50 किलो अफीम जब्त करने का दावा किया था।

इसके बाद सोहनलाल ने हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की।
5 दिसंबर की सुनवाई में बचाव पक्ष ने एक बस सीसीटीवी फुटेज पेश किया, जिसमें तीन सादी वर्दी वाले पुलिसकर्मी सोहनलाल को बस से उतारते दिखे—लेकिन उसमें उसके पास कोई बैग नहीं दिखाई दिया। बचाव पक्ष ने दावा किया कि बरामदगी दिखाने का पूरा घटनाक्रम फर्जी है।

वहीं, बस मालिक ने हलफनामा देकर कहा कि “पेश किया गया वीडियो मेरी बस का नहीं है।” इससे मामला और जटिल हो गया और कोर्ट ने आरोपित को जमानत पर रिहा किया, साथ ही 9 दिसंबर को एसपी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के आदेश दिए।

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